मुंबई 23 Dec, (Rns): महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में आए 288 नगर परिषद और नगर पंचायत चुनाव के नतीजों ने ‘ठाकरे ब्रांड’ को गहरा झटका दिया है। इन नतीजों से सबक लेते हुए अब उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए 20 साल पुरानी कड़वाहट भुला दी है। खबर है कि दोनों भाइयों ने बीएमसी समेत राज्य के 29 नगर निगमों के चुनाव एक साथ लड़ने का फैसला किया है। इस गठबंधन का औपचारिक ऐलान आज (मंगलवार) वर्ली के एनएससीआई डोम में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए किया जा सकता है।
बीजेपी की आंधी ने किया मजबूर
हालिया निकाय चुनावों में बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति ने 70 प्रतिशत से अधिक सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि उद्धव की शिवसेना सिंगल डिजिट में सिमट गई और राज ठाकरे की मनसे का खाता भी नहीं खुला। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और बीजेपी की जोड़ी ने उद्धव ठाकरे के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। इसी चुनौती से निपटने के लिए दोनों भाई साथ आए हैं। सोमवार देर शाम मनसे नेता बाला नांदगांवकर और नितिन सरदेसाई ने ‘मातोश्री’ जाकर उद्धव ठाकरे से मुलाकात की और गठबंधन के फॉर्मूले को अंतिम रूप दिया।
सीट शेयरिंग का गणित और चुनाव की तारीखें
सूत्रों के मुताबिक, बीएमसी की कुल 227 सीटों के बंटवारे पर सहमति बन गई है। इसमें उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) 150 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ सकती है, जबकि राज ठाकरे की मनसे को 60 से 70 सीटें दी जा सकती हैं। शेष सीटें अन्य छोटे सहयोगियों के लिए छोड़ी जाएंगी। बता दें कि चुनाव आयोग ने अधिसूचना जारी कर दी है। मंगलवार से नामांकन शुरू हो रहे हैं, जो 30 दिसंबर तक चलेंगे। राज्य की सभी 29 महानगर पालिकाओं के लिए 15 जनवरी को मतदान होगा और अगले ही दिन 16 जनवरी को नतीजे घोषित किए जाएंगे।
कांग्रेस को साधने की चुनौती
इस नए गठबंधन के बीच महा विकास आघाड़ी में कांग्रेस की स्थिति को संभालना सबसे बड़ी चुनौती है। मनसे की उत्तर भारतीय विरोधी छवि के चलते कांग्रेस राज ठाकरे के साथ मंच साझा करने से इनकार करती रही है। ऐसे में संजय राउत लगातार राहुल गांधी और कांग्रेस आलाकमान के संपर्क में हैं ताकि विपक्षी एकता बनी रहे और बीजेपी के खिलाफ सीधा मुकाबला हो सके।
मुंबई के किले पर कब्जे की लड़ाई
यह चुनाव सिर्फ एक निकाय चुनाव नहीं, बल्कि ठाकरे परिवार की विरासत बचाने की आखिरी लड़ाई है। मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पर पिछले 30 सालों से ठाकरे परिवार का कब्जा रहा है और यह उनकी ताकत का मुख्य केंद्र है। बीएमसी का बजट देश के कई छोटे राज्यों के बजट से भी ज्यादा है, जो पार्टी को जमीनी स्तर पर चलाने में मदद करता है। बीजेपी और एकनाथ शिंदे की नजर अब इसी ‘सोने की चिड़िया’ पर है। उन्होंने बीएमसी की 150 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। अब देखना होगा कि ‘ठाकरे ब्रदर्स’ का यह रीयूनियन मुंबई में उनकी पकड़ बनाए रख पाता है या नहीं।

