जालोर 23 Dec, (rns): डिजिटल इंडिया के दौर में राजस्थान के जालोर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ की एक पंचायत ने महिलाओं की आजादी पर पहरा बिठाते हुए अजीबोगरीब फरमान सुनाया है। चौधरी समाज सुंधामाता पट्टी की पंचायत ने फैसला लिया है कि समाज के 15 गांवों की बहू-बेटियां अब स्मार्ट फोन (कैमरे वाला मोबाइल) का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगी। पंचायत द्वारा पारित यह नियम आगामी 26 जनवरी से प्रभावी होगा।
सार्वजनिक कार्यक्रमों में फोन ले जाने पर पाबंदी
रविवार को गाजीपुर गांव में 14 पट्टी के अध्यक्ष सुजनाराम चौधरी की अध्यक्षता में हुई समाज की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में देवाराम कारनोल द्वारा रखे गए प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए पंचों ने तय किया कि महिलाएं स्मार्ट फोन की जगह केवल साधारण की-पैड वाला फोन ही उपयोग में ले सकेंगी। इतना ही नहीं, महिलाओं को अब किसी भी शादी-समारोह, सामाजिक कार्यक्रम या पड़ोसी के घर जाते समय अपने साथ मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं होगी।
पढ़ाई के लिए केवल घर में मिलेगी छूट
बैठक में फैसले को पढ़कर सुनाते हुए पंच हिम्मताराम ने बताया कि पढ़ाई करने वाली बच्चियों के लिए नियमों में थोड़ी ढील दी गई है। अगर पढ़ाई के लिए स्मार्ट फोन जरूरी है, तो छात्राएं इसका उपयोग कर सकती हैं, लेकिन इसके लिए शर्त यह है कि वे मोबाइल का इस्तेमाल केवल घर के भीतर ही करेंगी। उन्हें भी घर से बाहर मोबाइल ले जाने की इजाजत नहीं होगी।
पंचायत का अजीब तर्क- बच्चों की आंखें खराब हो रही हैं
समाज के अध्यक्ष सुजनाराम चौधरी ने इस फैसले के पीछे तर्क दिया कि महिलाओं के पास स्मार्ट फोन होने से घर के बच्चे उसका ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इससे बच्चों की आंखें खराब होने का डर बना रहता है, इसलिए यह कड़ा कदम उठाना जरूरी था।
यह नियम जालोर जिले के गजीपुरा, पावली, कालड़ा, मनोजिया वास, राजीकावास, दातलावास, राजपुरा, कोड़ी, सिदरोड़ी, आलड़ी, रोपसी, खानादेवल, साविधर, खानपुर और भीनमाल की हाथमी की ढ़ाणी में लागू किया जाएगा। उधर, पंचायत के इस फैसले के सार्वजनिक होते ही सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है और लोग इसे दकियानूसी बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना कर रहे हैं।

