भोपाल 23 दिसंबर (आरएनएस)।राजधानी की स्वास्थ्य सेवाओं में एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। भोपाल में मुख्यमंत्री संजीवनी क्लिनिक में पदस्थ कुछ चिकित्सकों ने नियमों को ताक पर रखकर ड्यूटी से गैरहाजिर रहते हुए ‘सार्थक ऐपÓ पर उपस्थिति दर्ज कराई। हैरानी की बात यह रही कि एक डॉक्टर ने कार्यस्थल से 500 किलोमीटर दूर से अटेंडेंस लगा दी। जबकि दूसरे मामले में एक ही चिकित्सक की हाजिरी में अलग-अलग चेहरों की तस्वीरें सामने आईं। यह खुलासा सीएमएचओ कार्यालय में हुई सार्थक ऐप की समीक्षा के दौरान हुआ।
मामला सामने आते ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) भोपाल डॉ. मनीष शर्मा ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता और विभागीय दायित्वों के विपरीत मानते हुए तत्काल कार्रवाई की। संजीवनी क्लिनिक के दो चिकित्सकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और संतोषजनक जवाब न मिलने पर कठोरतम वैधानिक कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं।
भोपाल सीएमएचओ कार्यालय द्वारा सार्थक ऐप पर दर्ज की जा रही उपस्थिति की निगरानी शुरू की गई। इसी प्रक्रिया में जब हालिया डेटा की जांच की गई, तो कुछ एंट्री असामान्य पाई गईं। ऐप में दर्ज लोकेशन और फोटो वेरिफिकेशन ने स्पष्ट संकेत दिए कि कुछ चिकित्सक वास्तविक कार्यस्थल पर मौजूद नहीं थे, बावजूद इसके उनकी उपस्थिति दर्ज हो रही थी। यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है।
जांच में सामने आया कि मुख्यमंत्री संजीवनी क्लिनिक, गौतम नगर में पदस्थ चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव सिंह ने विगत दिनों कार्यस्थल से लगभग 500 से 600 किलोमीटर की दूरी से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इतना ही नहीं, रोजमर्रा की उपस्थिति भी लगभग 11 किलोमीटर दूर की लोकेशन से लगाई जा रही थी। यह स्थिति स्पष्ट रूप से यह दर्शाती है कि चिकित्सक नियमित रूप से अपने निर्धारित क्लिनिक में उपस्थित नहीं थे, जबकि रिकॉर्ड में उनकी हाजिरी दर्ज हो रही थी।
दूसरा मामला मुख्यमंत्री संजीवनी क्लिनिक, बाग मुगलिया से जुड़ा है। यहां पदस्थ चिकित्सक डॉ. मिनहाज की उपस्थिति जांच के दौरान और भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। सार्थक ऐप पर दर्ज हाजिरी में अलग-अलग लोगों के चेहरे दिखाई दिए। इससे यह संदेह गहराया कि या तो ऐप का दुरुपयोग किया गया या फिर किसी अन्य व्यक्ति से उपस्थिति दर्ज करवाई गई। यह मामला केवल अनुपस्थिति का नहीं, बल्कि तकनीकी प्रणाली से छेड़छाड़ की ओर भी इशारा करता है।
सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा का कहना है कि इस तरह की नियमविरुद्ध उपस्थिति केवल कागजी गड़बड़ी नहीं है। इसका सीधा असर मरीजों के उपचार पर पड़ता है। संजीवनी क्लिनिक का उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आम नागरिकों को सुलभ और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। यदि चिकित्सक ही अपने कार्यस्थल पर मौजूद नहीं होंगे, तो मरीजों की जांच, इलाज और परामर्श प्रभावित होना स्वाभाविक है।
सीएमएचओ डॉ. शर्मा ने कहा कि इस तरह का कृत्य न केवल विभागीय दायित्वों के विपरीत है, बल्कि अवैधानिक भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी सेवा में रहते हुए उपस्थिति में हेरफेर करना गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सीएमएचओ ने दोनों चिकित्सकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। नोटिस में यह पूछा है कि किस आधार पर कार्यस्थल से दूर रहते हुए उपस्थिति दर्ज की गई। अलग-अलग चेहरों वाली हाजिरी कैसे संभव हुई? अधिकारियों के मुताबिक, यदि चिकित्सकों का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो उनके खिलाफ कठोरतम अनुशासनात्मक और वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

