0-कुमार विश्वास सहित अन्य सुप्रसिद्ध साहित्यकारों ने श्रद्धासुमन अर्पित किया
0-मुख्यमंत्री ने निवास पहुँचकर दिया अर्थी को कंधा

रायपुर, 24 दिसंबर (आरएनएस)। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज सवेरे राजधानी रायपुर के कटोरा तालाब स्थित वरिष्ठ साहित्यकार एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित स्वर्गीय श्री विनोद कुमार शुक्ल के निवास पहुँचे और उनके अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर नमन किया तथा ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वर्गीय श्री शुक्ल के पार्थिव शरीर को कंधा देकर उन्हें भावपूर्ण अंतिम विदाई दी। उन्होंने शोक संतप्त परिजनों से भेंट कर अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं तथा असंख्य पाठकों और साहित्य-प्रेमियों को इस अपार दु:ख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी से उपजे महान साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल के निधन से हिंदी साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति पहुँची है। उनकी रचनाएँ संवेदनशीलता, मानवीय सरोकारों और सरल किंतु गहन अभिव्यक्ति की अनुपम मिसाल हैं।

उन्होंने कहा कि श्री शुक्ल की लेखनी ने हिंदी साहित्य को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की। उनका साहित्य न केवल पाठकों को गहराई से स्पर्श करता है, बल्कि आने वाली पीढिय़ों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत बना रहेगा। साहित्य जगत में उनका अवदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
इस अवसर पर कवि डॉ. कुमार विश्वास, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी श्री अलोक सिंह, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार, जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारी गण उपस्थित थे।
अंतिम संस्कार में लोग हुए बड़ी संख्या में शामिल
आज राजधानी में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस अवसर साहित्य प्रेमी पत्रकार एवं अन्य लोग शामिल थे। बत्ती मैंने बुझाई, मैं विनोद कुमार शुक्ला लिखते-लिखते जीए, उन्होंने एम्स में यह कविता लिखी। अंतिम संस्कार में उनके पुत्र शाश्वत सहित अन्य लोग शामिल हुए। शमशान घाट में उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। राजनांदगांव में जन्मे सुप्रसिद्ध कवि कथा कार, उपन्यासकार को अनेक पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्हें साहित्य एकेडमी तथा ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। फिल्मकार मणि कौल ने एक फिल्म बनाई थी।
आर. शर्मा

