भानुप्रतापपुर, 24 दिसंबर (आरएनएस)। आमाबेड़ा बड़े तेवड़ा में धर्मातरण को लेकर विवाद एवं प्रदेश में धर्मातरण को लेकर जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष देवलाल दुग्गा ने पत्रकारों से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि
यदि प्रदेश सरकार वाकई आदिवासी के हितैषी है तो धर्मातरण पर विधेयक लाये।
पत्रकार भवन में मंगलवार शाम को बडे तेवड़ा में हुए विवाद पर चर्चा करते हुए कहा कि शुरू से ही आदिवासी समाज के लोगों के साथ अत्याचार हो रहे है। चाहे मुगलो का शासनकाल हो या फिर अंग्रेजों का रहा है। देश जब आजाद हुआ था तब से कुछ राजनीतिक दलों या पूंजीपतियों के द्वारा बड़े पैमाने पर धर्मातरण करए गए।
उन्होंने बताया कि कुछ धर्मातरण हुए आदिवासियों बुजुर्ग सियानो से पूछा कि आप अपने धर्म को छोड़कर ईसाई धर्म मे क्यो चले गए इस पर बीमारी,शिक्षा आदि कारण सामने आए है। लेकिन समाज मे कुछ लोग ऐसे भी है कि पुरखो के बताए हुए रास्ते मे चलते हुए अपने धर्म का पालन कर रहे है। समय समय पर इनके द्वारा धर्मातरण का विरोध भी किये जाते रहे है।
जैसे मैन सुना है कि बड़े तेवड़ा में हुए विवाद पर कहा कि इसमें कोई आदिवासी की गलती को नही मानता क्योंकि मसीह समाज के लोग लाठी डंडे से पहले आदिवासियों पर हमला किया,अपने बचाव में आदिवासियों ने भी किया और विवाद के स्थिति निर्मित हुई है। संवेधानिक दृष्टि से देखा जाए तो पेशा एक्ट, व ग्राम सभा को प्राथमिकता दी गई है
उन्होंने कहा कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र में कुछ मंत्रियों के द्वारा धर्मातरण पर विधेयक लाने की बात कही गई थी। लेकिन विधानसभा के शीतकालीन सत्र समाप्त हो गई इस विषय पर कोई चर्चा नही किया गया। मैं प्रदेश के सरकार से निवेदन करना चाहता हूँ कि यदि सरकार वाकई आदिवासी के हितैषी है तो धर्मातरण विषय पर विधेयक लाये तभी सरकार के हितैषी होंगे।
०००
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

