भोपाल 24 दिसंबर (आरएनएस)।राजधानी भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। महिला चिकित्सकों की सुरक्षा, मानसिक प्रताडऩा, यौन उत्पीडऩ, अवैध निजी प्रैक्टिस और बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है।
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के झुग्गी-झोपड़ी प्रकोष्ठ ने एम्स प्रशासन पर महिलाओं के उत्पीडऩ को संरक्षण देने और मरीजों को समय पर इलाज न मिलने के गंभीर आरोप लगाए हैं। बुधवार को एम्स निदेशक के नाम सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि हालात इतने खराब हैं कि इमरजेंसी में भी मरीज महीनों इंतजार कर रहे हैं और इसका खामियाजा उनकी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी (झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ) के प्रदेश अध्यक्ष निकेश ईश्वर सिंह चौहान ने एम्स भोपाल के निदेशक के नाम ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि संस्थान में कार्यरत महिला डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा और स्वतंत्रता पर ग्रहण लग चुका है। अनुशासन के नाम पर मानसिक दबाव और कथित यौन उत्पीडऩ ने कार्यस्थल को महिलाओं के लिए असुरक्षित बना दिया है।
ज्ञापन में दावा किया गया कि विभागाध्यक्ष मोहम्मद यूनुस द्वारा की गई कथित प्रताडऩा के चलते 12 दिसंबर को डॉ. रश्मि वर्मा ने एनेस्थीसिया की ओवरडोज लेकर आत्महत्या का प्रयास किया। उनकी हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। इसके अलावा डॉ. श्रुति दुबे, डायलिसिस टेक्नीशियन उन्नति सिमोन, फरहीन अंजुम, रेखा ठाकुर और ऑफिस असिस्टेंट संध्या सिमोन को मानसिक प्रताडऩा के कारण संस्थान से बाहर किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।
कांग्रेस का आरोप है कि यह पूरा मामला केवल एक विभाग तक सीमित नहीं है। नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. महेंद्र कुमार अटलानी, मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. विकास गुप्ता, मैनपावर एजेंसी डब्ल्यूसीएस के एचआर और एरिया मैनेजर ऋषभ दुबे सहित कुछ प्रशासनिक अधिकारी इस कथित महिला उत्पीडऩ को मौन रूप से संरक्षण दे रहे हैं। आरोप है कि पीडि़त सभी कर्मचारी महिलाएं हैं, जबकि दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि एम्स के कई डॉक्टर संस्थान में नौकरी के साथ-साथ गुपचुप तरीके से निजी अस्पतालों में प्रैक्टिस कर रहे हैं, जो एम्स की नियमावली के अनुसार अवैध है। आरोप है कि जो डॉक्टर निजी प्रैक्टिस में शामिल नहीं हैं या सवाल उठाते हैं, उन्हें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मानसिक दबाव और उत्पीडऩ का सामना करना पड़ता है। इसी कारण कई होनहार चिकित्सक एम्स छोड़ चुके हैं या डॉ. रश्मि वर्मा की तरह आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हुए हैं।
प्रदर्शन में शामिल पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि एम्स भोपाल में लगातार व्यवस्थाएं बिगड़ती जा रही हैं। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि 7 दिन के भीतर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो कांग्रेस एम्स के अंदर घुसकर आंदोलन करेगी। शर्मा ने नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष पर निजी अस्पताल में प्रैक्टिस करने के आरोप दोहराते हुए कहा कि इसकी शिकायतें पहले भी एम्स प्रशासन तक पहुंचाई जा चुकी हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
कांग्रेस नेता शर्मा ने कहा कि एम्स में सिक्योरिटी एजेंसी 10 हजार रुपए लेकर गार्ड की नौकरी लगवा रही है। डॉ. अटलानी के बारे में जानकारी है कि वे प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं। इसके अलावा भी कई तरह की गड़बडिय़ां एम्स में चल रही हैं। जिनमें सुधार के लिए ज्ञापन दिया गया है। यदि सुधार नहीं होता है तो अगली बार एम्स के अंदर घुस कर आंदोलन किया जाएगा।

