लखनऊ,27 दिसंबर (आरएनएस)। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और सम्मान का मजबूत आधार बन रहे हैं। प्रदेश भर में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लाखों दीदियां न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनकर उभर रही हैं। यह अभियान ग्रामीण भारत के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव की कहानी लिख रहा है।उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक मजबूती से ही विकसित भारत का संकल्प साकार होगा। महिला सशक्तिकरण के माध्यम से आत्मनिर्भर ग्राम और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण संभव है। स्वयं सहायता समूहों की ताकत से ग्रामीण भारत का भविष्य बदलेगा। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी अभियान के माध्यम से गांव-गांव समृद्धि पहुंचेगी और महिलाओं को सम्मान मिलेगा, जबकि महिला उद्यमिता और आजीविका संवर्धन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी।गणतंत्र दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित परेड में उत्तर प्रदेश के स्वयं सहायता समूहों के विभिन्न कैडर्स से जुड़ी 14 लखपति दीदियां विशेष अतिथि के रूप में प्रतिभाग करेंगी। इनमें बिजनौर जनपद की ऋतु हलदर और सुमन रानी भी शामिल हैं, जो आत्मविश्वास, परिश्रम और सरकारी योजनाओं के सही उपयोग से आत्मनिर्भर बनीं और आज महिला सशक्तिकरण की सशक्त मिसाल हैं। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस पर इन दीदियों का विशेष अतिथि के रूप में चयन उत्तर प्रदेश, विशेषकर स्वयं सहायता समूह आंदोलन के लिए गौरव की बात है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री और भारत सरकार के प्रति आभार भी व्यक्त किया है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इन दीदियों को दिल्ली ले जाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय से सुनिश्चित की जाएं।
बिजनौर की ऋतु हलदर और सुमन रानी न केवल स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को दिल्ली ले जाएंगी, बल्कि जिले की पारंपरिक वुड क्राफ्ट कला को भी राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करेंगी। कभी आर्थिक तंगी और पारिवारिक कठिनाइयों से जूझ रहीं ऋतु और सुमन आज सफल महिला उद्यमी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर उन्होंने न केवल अपनी आजीविका विकसित की, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए प्रशासन ने दोनों को लखपति दीदी क्लब में शामिल किया है।सुमन रानी, ग्राम अब्दुल्लापुर ब्लॉक हलदौर की निवासी हैं। सीमित आय और बढ़ती पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने हार नहीं मानी। बीए तक शिक्षित सुमन ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बचत की शुरुआत की और ग्राम्य विकास विभाग की सीएलएफ योजना के अंतर्गत लेखाकार के रूप में कार्य किया। मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने नई पहचान बनाई और आज विवेक विश्वविद्यालय परिसर स्थित विदुर कैफे का सफल संचालन करते हुए प्रतिदिन तीन से चार हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।इसी तरह ग्राम घासीवाला, ब्लॉक मोहम्मदपुर देवमल की निवासी ऋतु हलदर ने संघर्ष को अपनी ताकत बनाया। 12वीं तक शिक्षित ऋतु ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली और समूह अध्यक्ष के रूप में आगे बढ़ीं। आत्मनिर्भर बनने की ललक ने उन्हें दोबारा पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और वर्तमान में वे बीए की पढ़ाई कर रही हैं। आज वे अपनी सहयोगी माया चक्रवर्ती के साथ नजीबाबाद रोड स्थित वर्धमान कॉलेज के पास विदुर कैफे का संचालन कर रही हैं, जहां से प्रतिदिन तीन से चार हजार रुपये तक की आय अर्जित कर अपने परिवार को संबल देने के साथ-साथ अनेक महिलाओं के लिए उम्मीद और प्रेरणा बन चुकी हैं।लोकल फॉर वोकल अभियान के तहत स्वदेशी और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में ऋतु हलदर और सुमन रानी जैसी दीदियां जमीनी स्तर पर मजबूत उदाहरण बनकर सामने आई हैं। ग्रामीण आजीविका मिशन से प्राप्त जानकारी के अनुसार गणतंत्र दिवस से दो दिन पूर्व ये दीदियां नई दिल्ली के लिए रवाना होंगी और राष्ट्रीय मंच पर उत्तर प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं की सफलता की कहानी प्रस्तुत करेंगी।
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