—- उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति–2022 से निवेश को मिलेगा नया आयाम।
कुशीनगर, 27 दिसम्बर (आरएनएस)। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर के निर्देशानुसार प्रदेश की अर्थ व्यवस्था को सुदृढ़ करने एवं अधिक से अधिक निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार की सौर ऊर्जा नीति–2022 के प्रमुख प्रावधानों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। इस नीति के माध्यम से स्वच्छ, सस्ती एवं टिकाऊ ऊर्जा को बढ़ावा देते हुए जनपद में औद्योगिक विकास को नई दिशा दी जाएगी।
उक्त जानकारी उपायुक्त उद्योग अभय कुमार सुमन ने देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति–2022 का मुख्य उद्देश्य जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाना तथा वर्ष 2026–27 तक 22,000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त करना है। नीति के अंतर्गत प्रमुख प्रोत्साहन के सम्बंध में उन्होंने बताया कि- सौर ऊर्जा संयंत्र/सोलर पार्क की स्थापना हेतु प्रयुक्त भूमि पर स्टाम्प शुल्क में 100 प्रतिशत छूट, विद्युत शुल्क में 10 वर्षों तक 100 प्रतिशत छूट, आगामी पाँच वर्षों में प्रदेश के प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से 30 हजार युवाओं को सौर मित्र के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 2.50 करोड़ प्रति मेगावाट की दर से सब्सिडी के साथ 4 घंटे की बैटरी भंडारण प्रणाली युक्त ग्रिड स्केल सौर परियोजनाओं को प्रोत्साहन, निजी आवासीय क्षेत्रों में रूफटॉप सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना हेतु 15 हजार प्रति किलोवाट से लेकर अधिकतम 30 हजार प्रति किलोवाट तक सब्सिडी। तीसरे पक्ष को बिजली की बिक्री अथवा कैप्टिव उपयोग के मामलों में व्हीलिंग/ट्रांसमिशन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट। सौर ऊर्जा की खरीद पर अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन प्रणाली के लिए क्रॉस सब्सिडी अधिभार एवं ट्रांसमिशन शुल्क में 100 प्रतिशत छूट। निजी क्षेत्र द्वारा सौर पार्कों के विकास हेतु प्रदेश सरकार द्वारा उपयुक्त सहायता एवं सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंयी। उन्होंने जनपद के उद्यमियों, निवेशकों एवं आमजन से अपील किया है कि वे उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति–2022 का अधिकाधिक लाभ उठाते हुए स्वच्छ ऊर्जा को अपनाएं और जनपद के आर्थिक विकास में सहभागी बने।
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