अयोध्या,,अयोध्या 31 दिसंबर (आरएनएस ) । श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में प्रभु रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ ‘प्रतिष्ठा द्वादशीÓ बुधवार को श्रद्धा, उत्साह और भव्यता के साथ मनाई गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंग्रेजी नववर्ष 2026 की शुभकामनाएं देते हुए प्रार्थना की कि यह वर्ष सभी के लिए मंगलकारी, सुखद और समृद्धिदायक हो।समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या ने स्वतंत्र भारत में रामजन्मभूमि आंदोलन के अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। अयोध्या का नाम ही यह अनुभूति कराता है कि यह भूमि युद्ध और संघर्ष से परे रही है। यहां कभी कोई शत्रु टिक नहीं पाया, लेकिन कुछ लोगों ने अपने स्वार्थ, मजहबी जुनून और सत्ता के तुष्टिकरण की मानसिकता में अयोध्या को उपद्रव और संघर्ष का केंद्र बना दिया मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस अयोध्या में कभी संघर्ष नहीं हुआ, वहां उनके शासनकाल में आतंकी हमले हुए और पवित्र भूमि को लहूलुहान करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि जहां प्रभु की कृपा बरसती हो और जहां हनुमानगढ़ी में स्वयं हनुमान विराजमान हों, वहां आतंक कैसे सफल हो सकता है। वर्ष 2005 की घटना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आतंकियों के दुस्साहस का अंत सुरक्षा बलों ने तत्काल कर दिया था।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 11 वर्षों में तीन ऐसी तिथियां हैं, जिन्हें अयोध्या कभी विस्मृत नहीं कर सकती। पहली बार 5 अगस्त 2020 को किसी प्रधानमंत्री का अयोध्या आगमन हुआ और उसी दिन राम मंदिर का भूमि पूजन हुआ। इसके बाद 22 जनवरी 2024 को प्रभु रामलला की भव्य मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हुई। तीसरी महत्वपूर्ण तिथि 25 नवंबर 2025 रही, जब विवाह पंचमी के अवसर पर राम मंदिर के मुख्य शिखर पर सनातन धर्म की भगवा ध्वजा प्रतिष्ठित हुई और यह संदेश दिया गया कि सनातन से ऊपर कुछ नहीं।मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन में राजनाथ सिंह की भूमिका प्रत्यक्ष और महत्वपूर्ण रही है। संगठन और शासन के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए उन्होंने इस आंदोलन को मजबूती प्रदान की। उन्होंने कहा कि पांच सौ वर्षों के बाद प्रभु रामलला का अपने भव्य मंदिर में विराजमान होना आंदोलन से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के लिए गर्व और भावुकता का क्षण है। प्रतिष्ठा द्वादशी पर जब मां अन्नपूर्णा मंदिर के शिखर पर धर्मध्वजा का आरोहण हुआ, उस समय रक्षा मंत्री की आंखों में भावुकता साफ दिखाई दी।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले अयोध्या में मूलभूत सुविधाओं का अभाव था। बिजली, पानी, स्वच्छता, सड़क, संपर्क और सुरक्षा की स्थिति बेहद कमजोर थी। जयश्रीराम बोलने पर लाठी और गिरफ्तारी का सामना करना पड़ता था। आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। पिछले पांच वर्षों में 45 करोड़ से अधिक श्रद्धालु अयोध्या आए हैं। सूर्यवंश की राजधानी अयोध्या अब देश की पहली सौर नगरी बन चुकी है। यहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, रेल संपर्क सुदृढ़ हुआ है और चारों ओर से सड़क संपर्क बेहतर हुआ है। जहां कभी संकरी सड़कें थीं, आज वहां चौड़ी और आधुनिक सड़कें हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश में हर जगह जयश्रीराम और राम-राम कहने का वातावरण है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की योजनाएं अब गांव, गरीब और रोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ रही हैं, जिससे युवाओं और जरूरतमंदों को अपने क्षेत्र में ही सम्मानजनक आजीविका मिल सकेगी।रामभक्तों के संघर्ष को स्मरण करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी पीढ़ी सौभाग्यशाली है। वर्ष 1528 से लेकर आज तक रामभक्तों ने सत्ता, दमन, लाठी और गोली की परवाह किए बिना निरंतर संघर्ष किया। वे न रुके, न झुके और न बैठे। यह आंदोलन तब नई ऊंचाइयों पर पहुंचा, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और संत समाज ने नेतृत्व प्रदान किया। उसी संघर्ष का परिणाम है कि गुलामी का कलंक मिटा और भव्य राम मंदिर का निर्माण संभव हुआ।समापन संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्राण-प्रतिष्ठा के दो वर्ष पूर्ण होना किसी यात्रा का अंत नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है। अयोध्या की दिव्यता और भव्यता को अनंत काल तक बनाए रखने के लिए प्रत्येक सनातन धर्मावलंबी को आगे आना होगा। विरासत पर गर्व करते हुए विकास के नए प्रतिमान स्थापित करने होंगे। उन्होंने कहा कि जब देश आजादी के सौ वर्ष पूरे करेगा, तब प्रत्येक भारतवासी का संकल्प होना चाहिए कि वह अपनी विरासत का संरक्षण करते हुए अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करके देश और सनातन की ध्वजा को और ऊंचा उठाए। यही सामूहिक प्रयास भारत को विश्व की बड़ी शक्ति बनाएगा।
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