लखनऊ 31 दिसंबर (आरएनएस )। वर्ष 2025 नगर निगम लखनऊ के लिए अतिक्रमण हटाने के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों वाला वर्ष रहा। महापौर सुषमा खर्कवाल और नगर आयुक्त गौरव कुमार के निर्देशन में नगर निगम के सम्पत्ति विभाग ने पूरे वर्ष शहर के विभिन्न इलाकों में निरंतर अभियान चलाकर बड़ी मात्रा में नगर निगम और सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया। यह अभियान न केवल शहर के सुव्यवस्थित और नियोजित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, बल्कि सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण में भी मील का पत्थर रहा।नगर निगम द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी 2025 से 24 दिसंबर 2025 के बीच सम्पत्ति विभाग ने कार्रवाई करते हुए कुल 76 लाख 8 हजार 653 वर्गफुट भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया, जो लगभग 70 दशमलव 686 हेक्टेयर के बराबर है। यह भूमि लंबे समय से अवैध कब्जों, अस्थायी निर्माणों और अतिक्रमण की चपेट में थी, जिससे शहरी सौंदर्य प्रभावित होने के साथ-साथ विकास कार्यों में भी बाधाएं उत्पन्न हो रही थीं।अतिक्रमणमुक्त कराई गई इस भूमि का अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 4 अरब 21 करोड़ 28 लाख 74 हजार रुपये आंका गया है। इतनी बड़ी आर्थिक कीमत वाली भूमि को दोबारा नगर निगम के अधीन लाना प्रशासनिक दृष्टि से बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।वर्ष 2025 की सबसे बड़ी कार्रवाई गोमतीनगर क्षेत्र में देखने को मिली, जहां सहारा इंडिया के पास लीज पर दी गई 170 एकड़ बहुमूल्य भूमि को नगर निगम ने अपने कब्जे में लिया। लीज अवधि समाप्त होने के बाद विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए नगर निगम ने इस भूमि को कब्जे में लेकर सील कर दिया। अधिकारियों के अनुसार इस भूमि की वर्तमान बाजार कीमत अरबों रुपये में है।इस पूरे अभियान में सम्पत्ति विभाग के अधिकारियों, प्रवर्तन दलों और संबंधित जोनल टीमों ने आपसी समन्वय के साथ कार्रवाई की। कई स्थानों पर पहले नोटिस जारी किए गए और आवश्यकता पडऩे पर सख्त प्रवर्तन कार्रवाई भी की गई। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन का सहयोग भी लिया गया।नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई भूमि का उपयोग भविष्य में सड़क चौड़ीकरण, पार्कों के विकास, सार्वजनिक सुविधाओं, पार्किंग स्थलों और अन्य नागरिक सुविधाओं के लिए किया जाएगा। इससे शहर के नियोजित विकास को गति मिलेगी और आम नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा।
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