बीजिंग ,02 जनवरी। चीन ने ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में एक और बड़ी छलांग लगाई है। चीन के किंगहाई प्रांत के गोलमुड शहर के बाहरी इलाके में, गोबी रेगिस्तान के बीचों-बीच दुनिया का सबसे बड़ा ‘लिक्विड एयर एनर्जी स्टोरÓ बनाया जा रहा है। तकनीक की दुनिया में इसे ‘सुपर कोल्ड एयर बैटरीÓ का नाम दिया गया है। यह परियोजना न केवल अपने आकार की वजह से बल्कि अपनी अनोखी कार्यप्रणाली के कारण भी चर्चा में है। यहां विशाल सफेद टैंकों में हवा को भारी दबाव के साथ कंप्रेस किया जाता है और तापमान को माइनस 194 डिग्री सेल्सियस तक नीचे ले जाकर हवा को तरल (लिक्विड) में बदल दिया जाता है। भविष्य में जब भी बिजली की मांग बढ़ेगी, इसी लिक्विड हवा का इस्तेमाल कर टरबाइन घुमाए जाएंगे और बिजली पैदा की जाएगी।
‘इंटरेस्टिंग इंजीनियरिंगÓ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस विशालकाय ‘सुपर एयर पावर बैंकÓ को चाइना ग्रीन डेवलपमेंट इन्वेस्टमेंट ग्रुप ने चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के टेक्निकल इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिक्स एंड केमिस्ट्री के सहयोग से तैयार किया है। यह प्लांट जल्द ही अपनी सेवाएं देना शुरू कर देगा। इसकी क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह एक बार में 6 लाख किलोवाट प्रति घंटे बिजली की आपूर्ति करने में सक्षम है और लगातार 10 घंटे तक चल सकता है। अनुमान है कि यह संयंत्र साल भर में करीब 18 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन करेगा। इतनी बिजली से लगभग 30 हजार घरों की ऊर्जा जरूरतें आसानी से पूरी हो सकेंगी।
इस प्लांट की कार्यप्रणाली विज्ञान के अद्भुत सिद्धांतों पर आधारित है। यहां सबसे पहले बिजली का उपयोग करके हवा को साफ किया जाता है, फिर उसे दबाकर और ठंडा करके लिक्विड रूप में बड़े टैंकों में स्टोर कर लिया जाता है। जब ग्रिड को बिजली की जरूरत होती है, तो इस लिक्विड हवा को वापस गर्म किया जाता है। गर्म होने पर यह तेजी से गैस में बदलती है और फैलती है। हवा के इस तीव्र फैलाव की ताकत से टरबाइन घूमते हैं और बिजली बनती है। इस पूरी प्रणाली को गोबी रेगिस्तान में स्थित 2.5 लाख किलोवॉट के सोलर फार्म से सीधे जोड़ा गया है, ताकि अक्षय ऊर्जा का सही उपयोग हो सके।
इस तरह के प्लांट की जरूरत इसलिए भी महसूस की जा रही थी क्योंकि सूरज और हवा से मिलने वाली ऊर्जा हमेशा एक समान नहीं होती। मौसम के हिसाब से इसमें उतार-चढ़ाव होता रहता है, जिससे पावर ग्रिड की स्थिरता पर असर पड़ता है। शोधकर्ता वांग जुनजी का कहना है कि सोलर और विंड पावर की अनिश्चितता के कारण सप्लाई और डिमांड में संतुलन बनाना मुश्किल होता है। यह नया प्लांट अतिरिक्त बिजली को स्टोर करके रखेगा और जब धूप या हवा नहीं होगी, तब ग्रिड को बिजली देकर सप्लाई को सुचारू रखेगा। यह तकनीक भविष्य में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है।
00
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

