डा. वी.के. वर्मा के साहित्यिक योगदान पर विमर्श
बस्ती 6 जनवरी (आरएनएस )। साहित्यिक संस्था अदबी संगम द्वारा वरिष्ठ कवि डॉ. राम कृष्ण लाल ‘जगमगÓ की अध्यक्षता में पटेल एस.एम.एच. हासिपटल एवं पैरा मेडिकल कॉलेज गोटवा के सभागार में कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ होम्योपैथ के चिकित्सक और साहित्यकार डा. वी.के. वर्मा के साहित्यिक और सामाजिक सराकारों पर विमर्श के साथ ही उन्हें ‘ साहित्य शिल्पीÓ सम्मान से सम्मानित किया गया।
वरिष्ठ कवि डॉ. राम कृष्ण लाल ‘जगमगÓ ने कहा कि डा. वी.के. वर्मा अपने भीतर एक साथ कई विमर्श समेटे हुये हैं। वे एक समर्थ चिकित्सक के रूप में जहां पीडि़त लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाते हैं वहीं उनकी रचनाधर्मिता मेंं मानवता सर्वोपरि है। कहा कि ‘मानवता के स्वरÓ, ‘काव्य मुखीÓ, ‘युग चित्रÓ, ‘भावानुभूतिÓ, ‘काव्य सौरभÓ, ‘भाव मन्थनÓ, लघु कथा संग्रह ‘सोचÓ और कोविड-19 काव्य संग्रहÓ जैसी कृतियाँ साहित्य जगत में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। कहा कि उनके द्वारा रचित महाकाव्य ‘सिद्धार्थ से तथागतÓ अति शीघ्र पाठकों के सम्मुख होगा। कहा कि डा. वी.के. वर्मा साहित्य के क्षेत्र में बड़ी संभावना के कवि हैं।प्रसिद्ध कवि विनोद कुमार उपाध्याय ‘हर्षितÓ ने कहा कि डा. वर्मा ने चिकित्सक और साहित्यकार दोनों क्षेत्रों में स्वयं को सिद्ध किया है।
सम्मान प्राप्त करने के बाद डा. वर्मा ने कहा कि वे अपने अनुभवों और समाज के विभिन्न पहलुओं को काव्य में ढालने का प्रयास करते हैं। कोराना के समय जब पूरी मानवता डरी हुई थी तो वे मरीजों की सेवा के साथ ही कोविड-19 काव्य संग्रह की रचना का धर्म भी निभा रहे थे।कार्यक्रम के दूसरे चरण में कवि सम्मेलन और मुशायरे की शुरूआत अर्चना श्रीवास्तव की सरस्वती वंदना से हुई। विनोद कुमार उपाध्याय ‘हर्षितÓ की रचना ‘मोजिजा ऐसा मोहब्बत में हुआ करता है, दिल का दरवाजा निगाहों से खुला करता है, को सराहा गया। साहित्य भूषण सतीश आर्य ने कुछ यूं कहा- मैं हूं आनन अगर, तुम नयन हो मेरे, मै नयन हूं अगर तुम हो काजल प्रियेÓ सुनाकर वाह वाही लूटी। डा. वी.के. वर्मा की रचना ‘ लहरों का आघात सहा है, फिर भी कुछ भी नहीं कहा है, जिसका पुरसाहाल न कोई, उसका मैने हाथ गहा हैÓ सुनाकर मंच को नईदिाा दी। अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि डॉ. राम कृष्ण लाल ‘जगगमÓ ने कुछ यूं कहा- ‘नया वर्ष कुछ ऐसा कर दे, सबके उर में खुशियां भर दे, सोते हैं जो फुटपाथों पर उन्हें एक छोटा सा घर देÓ सुनाकर रचनात्मक संदेश दिया। संचालन करते हुये डॉ. अफजल हुसेन ‘अफजलÓ के शेर ‘ हमने बोये थे फूल राहो में, किसने बोये बबूल राहों मेंÓ के द्वारा वर्तमान हालात पर रोशनी डाली। कवि सम्मेलन और मुशायरे में काजी अनवार पारसा, सागर गोरखपुरी, दीपक सिंह प्रेमी, हरिकेश प्रजापति, जगदम्बा प्रसाद भावुक आदि की रचनाये सराही गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। आभार ज्ञापन पटेल एस.एम.एच. हासिपटल एवं पैरा मेडिकल कॉलेज गोटवा के डायरेक्टर डा. आलोक रंजन ने किया।
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