जौनपुर 7 जनवरी (आरएनएस )। अधिवक्ता आशीष शुक्ला को प्रतिबंधित चाइनीज मांझे से हुए जानलेवा हमले के मामले में न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने उनकी आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार करते हुए प्रवेश दे दिया तथा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के उस आदेश के खिलाफ नोटिस जारी किया, जिसमें गंभीर अपराध की शिकायत को साधारण परिवाद मानकर पुलिस जांच से इनकार कर दिया गया था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी को होगी। इस पूरे मामले में अधिवक्ता विकास तिवारी याचिकाकर्ता का पक्ष रख रहे हैं। ज्ञात हो कि घटना 13 जनवरी 2025 की है। अधिवक्ता आशीष शुक्ला अपने साथी अधिवक्ता शिवराज यादव उर्फ भैयालाल के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर न्यायालय से अपने घर जा रहे थे। शास्त्री पुल के निकट पतंग उड़ा रहे अज्ञात व्यक्तियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे प्रतिबंधित चाइनीज मांझे में दोनों फंस गए। मांझे से शिवराज यादव के चेहरे और गर्दन पर गंभीर चोटे आई, जबकि आशीष शुक्ला को भी चोटें पहुंची। अधिवक्ता द्वय को पतंग उड़ानें वाले प्रतिबंधित धागे में फंसा हुआ देख पतंग उड़ा रहे लोग तालियां बजाते और हंसते हुए घटना का मजा लेते रहे। दोनों अधिवक्ताओं का यश हॉस्पिटल में इलाज कराना पड़ा।पीडि़तों ने थाना लाइनबाजार में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की। पुलिस अधीक्षक को आवेदन देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूर होकर आशीष शुक्ला ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष अपने अधिवक्ता विकास तिवारी के माध्यम से आवेदन दाखिल किया, जिसमें प्राथमिकी दर्ज कर जांच की मांग की गई। लेकिन मजिस्ट्रेट ने इसे परिवाद मान लिया। इसके खिलाफ दाखिल पुनरीक्षण याचिका को अब सत्र न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है।
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