—- पीएम आवास का सपना टूटा, खुले आसमान के नीचे दिव्यांग का सत्याग्रह जारी। ठंड, भूख और खामोशी के बीच एक सवाल—क्या यही है सुशासन?
कुशीनगर, 07 जनवरी (आरएनएस)। जनपद के रामकोला थाना क्षेत्र के सिंगहा गांव की दिव्यांग महिला अल्पना तिवारी आज तीसरे दिन बुधवार को भी अपने ही घर के सामने अनशन पर बैठी हुई है। लेकिन अभी तक प्रशासन ने कोई सुधि नहीं ली है। खुले आसमान के नीचे बैठी अल्पना की खामोशी, शासन-प्रशासन के नेकनीयत कार्यशैली पर सवाल खडा कर रही है।
बताया जाता है कि अल्पना दिव्यांग है। लेकिन उनकी उम्मीद कभी लाचार नहीं थी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जब मकान स्वीकृत हुआ, तो लगा कि अब ज़िंदगी थोड़ी आसान होगी। उन्हें विश्वास हुआ कि सरकार ने आखिरकार उनकी पीड़ा देख ली है। लेकिन यह भरोसा ज्यादा दिन तक नही टिक सका। आरोप है कि पुलिस दबाव और दबंग विपक्षियों की मिलीभगत से निर्माण कार्य जबरन रुकवा दिया गया। एक पल में ही घर का सपना फिर से सड़क पर आ गिरा। महीनों से अल्पना खुले आसमान के नीचे रह रही हैं। ठंड की रातें उनके लिए सबसे बड़ी सज़ा बन गई हैं। कहना न होगा कि न्याय की आस में अल्पना ने हर दरवाजा खटखटाया जिलाधिकारी, उच्च अधिकारी, मुख्यमंत्री। जब कहीं से आवाज़ नहीं आई, तो राष्ट्रपति को पत्र लिखकर उन्होंने इच्छामृत्यु की मांग की। यह कोई सनक नहीं थी, बल्कि एक थकी हुई आत्मा की चीख थी, जिसे जीने की वजह छीन ली गई थी। आज तीसरे दिन अनशन पर बैठी अल्पना तिवारी प्रशासनिक अधिकारियों की मौके पर आने का बस इंतज़ार कर रही हैं शायद कोई अधिकारी आए, उसकी फरियाद कोई सुन ले और समस्या का समाधान करा दे।
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