बाराबंकी 7 जनवरी (आरएनएस)। कस्बा बिशुनपुर कस्बा निवासी आलोक जायसवाल ने अपने जि़ले और परिवार का मान बढ़ाया है, जिन्होंने शास्त्रीय संगीत में पी.एच.डी. करके जि़ले के प्रथम ऐसे व्यक्ति के रूप में अपना नाम दजऱ् किया है।शुरू से ही अपनी पढ़ाई के साथदृसाथ गायन की प्रतिभा को सर आंखों पर रखते हुए वरीयता दी जिसका श्रेय वो अपनी माता स्वर्गीय गीता देवी को देते हैं क्योंकि उन्होंने ही संगीत का बीज अपनी संतानों में बोया था।संगीत की प्रारम्भिक शिक्षा भातखंडे संगीत संस्थान से प्रारंभ करके उसको इस मुकाम पर ले जाना एक सपना था जिसको प्राप्त करना किसी के लिए एक उपलब्धि से कम नहीं है।आज वो देश और विदेश के तमाम छात्रों को संगीत की शिक्षा प्रदान कर रहे हैं और वर्तमान में वो सेठ एम आर जयपुरिया स्कूल गोमतीनगर में संगीत शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं।शास्त्रीय संगीत में पीएचडी, एम.पी.ए. निपुण, नेट और आकाशवाणी से बी. ग्रेड दोनों में आदि उपलब्धियां उन्हें शास्त्रीय गायन के गुरु डॉ विनीत पवैया, डॉ कमलेश दुबे, अजय अवस्थी, प्रोफ़ेसर सृष्टि माथुर, देवेंद्र पाठक, डॉ ऊषा रानी बनर्जी, स्व. तेज सिंह टाक, स्व. कृष्णानंद राय इत्यादि गुरुओं, माता पिता एवं ईश्वर की विशेष कृपा से प्राप्त हुई है।
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