राजगढ़ 18 जनवरी (आरएनएस)। पांच दिन की छुट्टी लेकर गांव लौट रहे सीआरपीएफ जवान की शनिवार रात सड़क हादसे में मौत हो गई।
मृतक की पहचान हालाहेड़ी गांव निवासी 35 वर्षीय सुरेश वर्मा के रूप में हुई है, जो वर्तमान में भोपाल में सीआरपीएफ में पदस्थ था। हादसा हालाहेड़ी गांव से महज डेढ़ किलोमीटर पहले तालाब के पास मोड़ पर हुआ, जहां तेज रफ्तार बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे लगे नीम के पेड़ से टकरा गई।
सुरेश वर्मा शनिवार को पांच दिन की छुट्टी लेकर भोपाल से गांव लौट रहा था। उसके साथ सीआरपीएफ में ही पदस्थ उसका दोस्त रामेश्वर दांगी भी था, जो हिनोत्या गांव का निवासी है। दोनों दोपहर करीब साढ़े 12 बजे बाइक से रवाना हुए थे।
रामेश्वर दांगी के मुताबिक, रास्ते में सुरेश की पल्सर बाइक के हैंडल और कुछ पाट्र्स ढीले महसूस हो रहे थे। एहतियात के तौर पर दोनों एक शोरूम पर रुके और मैकेनिक से बाइक की मरम्मत करवाई। इसके बाद वे धीरे-धीरे आगे बढ़े। शाम करीब साढ़े 7 बजे खिलचीपुर पहुंचकर सब्जी भी खरीदी।
खिलचीपुर से आगे बढ़ते हुए सुरेश ने अपने दोस्त रामेश्वर को हिनोत्या में उसके घर छोड़ दिया। रामेश्वर ने उसे खाना खाने के लिए रोका, लेकिन सुरेश ने मुस्कराते हुए कहा- घर पर रीना खाना लेकर इंतजार कर रही होगी, आज उसी के साथ खाना खाऊंगा।
हिनोत्या से निकलने के कुछ ही मिनट बाद हालाहेड़ी गांव से पहले तालाब के पास मोड़ पर हादसा हो गया। तेज रफ्तार बाइक नीम के पेड़ से टकरा गई। बाइक के अगले हिस्से के टुकड़े सड़क पर बिखर गए, अगला टायर टूटकर अलग जा गिरा और हेलमेट भी टूट हो गया। सिर और चेहरे पर गंभीर चोट लगने से सुरेश की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण और परिजन मौके पर पहुंचे। सुरेश को तुरंत खिलचीपुर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जिस वक्त घर में उसके आने की तैयारी चल रही थी, उसी समय अस्पताल से मौत की खबर पहुंची। गांव में जवान की मौत से शोक का माहौल है।
सीआरपीएफ जवान सुरेश वर्मा एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखता था। उसके पिता बापू वर्मा खेती-किसानी करते हैं। परिवार में मां, बड़े भाई मुकेश वर्मा और अन्य परिजन हैं। सुरेश की शादी वर्ष 2009 में भूमका गांव निवासी रीना वर्मा से हुई थी। दंपती के दो बेटे हैं-रोहित (7) और कार्तिक (3)। हादसे की खबर मिलते ही पत्नी रीना बेसुध हो गई, जबकि दोनों मासूम बच्चे यह समझ ही नहीं पा रहे हैं कि उनके पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे।
बड़े भाई मुकेश वर्मा ने बताया कि शनिवार सुबह ही सुरेश से फोन पर बात हुई थी। वह काफी खुश था और कह रहा था कि रविवार को पूरा परिवार दूधी स्थित राधा स्वामी सत्संग आश्रम जाएगा। माता-पिता और बच्चे पहले ही सत्संग के लिए निकल गए थे और सुरेश के गांव पहुंचने का इंतजार किया जा रहा था। लेकिन रात में अचानक सड़क हादसे की सूचना मिल गई।
गांव के लोगों के मुताबिक, सुरेश बेहद मिलनसार, शांत और हंसमुख स्वभाव का व्यक्ति था। छुट्टी में गांव आने पर वह हर किसी से आत्मीयता से मिलता था। पिछले सात-आठ महीनों से वह आध्यात्मिक जीवन की ओर अधिक झुक गया था। उसने मांसाहार छोड़ दिया था और गुरु नाम लेने तथा सत्संग में जाने की बात करता रहता था।
हादसे की सूचना मिलते ही खिलचीपुर थाना प्रभारी उमाशंकर मुकाती और आरक्षक राजीव गुर्जर मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। रविवार सुबह करीब 8 बजे खिलचीपुर अस्पताल में पोस्टमार्टम किया गया। इसके बाद जवान का अंतिम संस्कार गांव में किया जाएगा।
घटना के बाद पूरे हालाहेड़ी गांव में मातम पसरा हुआ है। हर आंख नम है और हर जुबान पर एक ही सवाल है—जो जवान रोज देश की सुरक्षा में तैनात रहता था, उसकी जिंदगी अपने ही गांव की सड़क पर इस तरह कैसे खत्म हो गई।

