भोपाल 18 जनवरी (आरएनएस)।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इंडिया एआई मिशन-भारत को राष्ट्रीय स्तर की एआई अवसंरचना विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। वैश्विक एआई रैंकिंग-2025 में भारत ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। एआई को उत्पादकता बढ़ाने तथा देश की आईटी प्रतिभा, जनसांख्यिकीय लाभांश और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रभावी उपयोग के लिए रणनीतिक साधन के रूप में अपनाया गया है। स्वदेशी डेटासेट्स, भारतीय भाषाओं पर आधारित फाउंडेशन मॉडल्स, सब्सिडी आधारित कंप्यूटर अवसंरचना और सुरक्षित व भरोसेमंद एआई गवर्नेंस फ्रेमवर्क इंडिया एआई की प्रमुख विशेषताएँ हैं।
उच्च गुणवत्ता वाले डेटासेट्स प्रभावी एआई प्रणालियों की नींव होते हैं। ‘एआई कोशÓ प्लेटफॉर्म पर 6,250 से अधिक स्वदेशी क्यूरेटेड डेटासेट्स उपलब्ध हैं, जिनके साथ सैंडबॉक्स टूल्स और नि:शुल्क कंप्यूटर एक्सेस प्रदान किया जा रहा है। सब्सिडाइज्ड दरों पर 38 हजार जीपीयू उपयोग में लाए जा रहे हैं। इससे बड़े पैमाने पर एआई नवाचार को गति मिली है। ‘इनोवेशन सेंटरÓ के माध्यम से 12 स्टार्टअप को स्वदेशी एलएलएम और एसएलएम विकसित करने में सहयोग दिया जा रहा है।
केआरएआई डायग्नोस्टिक्स ने छाती के एक्स-रे से एआई के माध्यम से टीबी स्क्रीनिंग की प्रक्रिया विकसित की है। उदाहरण प्रस्तुत किया। इंडिया एआई के सहयोग से यह तकनीक 105 से अधिक देशों में लागू हो चुकी है और इसे एफडीए की स्वीकृति भी प्राप्त है। कंवर्ज इन (नोकोबा) सरकारी कॉल सेंटर्स और शिकायत निवारण प्रणालियों में एआई एजेंट्स के उपयोग पर काम कर रहा है। व्हाट्सएप आधारित संवाद प्रणाली, शत-प्रतिशत कॉल ऑडिटिंग और एसओपी अनुपालन से परिचालन लागत घटी है और नागरिक संतुष्टि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
इंडिया एआई मिशन के ‘एआई फॉर ऑलÓ कार्यक्रम के अंतर्गत उद्योग-संरेखित पाठ्यक्रम, फेलोशिप्स और देशभर में 570 एआई एवं डेटा लैब्स स्थापित की जा रही हैं। यूजी, पीजी और पीएचडी विद्यार्थियों को स्टाइपेंड, मेंटरशिप और कंप्यूटर एक्सेस उपलब्ध कराया जा रहा है।
‘जिला जीआईएस प्लानिंग सिस्टमÓ के माध्यम से जमीनी स्तर पर योजना और निगरानी को सशक्त किया जा रहा है। एआई, जीआईएस, ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी के एकीकृत उपयोग से शहरी नियोजन, जल प्रबंधन और खनन निगरानी में पारदर्शिता लाई जा रही है।
भारत प्रारंभिक डिजिटलीकरण से आगे बढ़कर अब बड़े पैमाने पर डिजिटल सार्वजनिक सेवा वितरण में उल्लेखनीय प्रगति कर चुका है। आधार, यूपीआई, कोविन, डिजिलॉकर, भाषिणी और ओएनडीसी इस परिवर्तन की मजबूत आधारशिला बन गये हैं।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ एआई के एकीकरण से स्वास्थ्य जांच, बहुभाषी सेवा वितरण और निर्णय समर्थन प्रणालियों में शासन की दक्षता कई गुना बढ़ाई जा सकती है। भाषाई समावेशन डिजिटल समानता का आधार है। नेतृत्व-आधारित परिवर्तन और क्षमता निर्माण एकीकृत बैक-एंड प्लेटफॉम्र्स के लिये आवश्यक हैं।
एआई उत्पादकता वृद्धि, रोजगार सृजन, नवाचार और समावेशी विकास का सशक्त माध्यम बन गई है। एआई को केवल तकनीकी समाधान नहीं, बल्कि मानव-केंद्रित और सामाजिक प्रभाव आधारित दृष्टिकोण के साथ अपनाये जाने की आवश्यकता है।
कृषि में एआई आधारित मृदा परीक्षण और सलाह प्रणालियों को किसानों की निर्णय प्रक्रिया को सरल बनाने वाला तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स रोग पहचान में तेजी लाने वाला प्रभावी उपकरण बन गया है। एमएसएमई और टियर-2 व टियर-3 क्षेत्रों में एआई विस्तार के लिए मजबूत डिजिटल अवसंरचना, साझा डेटा प्लेटफॉर्म और उपयुक्त संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता है।
सुरक्षित, लचीली और भविष्य के लिये तैयार डिजिटल एवं एआई अवसंरचना के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एआई अब आकांक्षात्मक तकनीक नहीं, बल्कि सार्वजनिक सेवा वितरण, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और डिजिटल शासन की मूल आवश्यकता बन चुकी है।
सॉवरेन डेटा और कंप्यूटर अवसंरचना के रणनीतिक महत्व की दृष्टि से उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग, स्वदेशी हार्डवेयर, सुरक्षित डेटा सेंटर और मजबूत सप्लाई चेन को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता है। गोपनीयता, अनुपालन, जवाबदेही और जोखिम प्रबंधन को एआई के पूरे जीवनचक्र में अंतर्निहित किया जाना चाहिए। भरोसेमंद और सुरक्षित एआई अवसंरचना भारत के दीर्घकालिक डिजिटल नेतृत्व की कुंजी है।

