बिलासपुर/हमीरपुर ,08 फरवरी (आरएनएस)। हिमाचल के लदरौर में एक फरवरी की शाम को हुई दरिंदगी का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस प्रशासन की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। एक स्थानीय कारोबारी और उनकी पत्नी को लाठी-डंडों से पीटा गया, पति का दांत टूट गया और आंख की हड्डी फ्रैक्चर हो गई, लेकिन सातवां दिन शुरू होने तक पुलिस ने मामले में एफआईआर (स्नढ्ढक्र) दर्ज नहीं की। लदरौर बाजार में कपड़ों की दुकान चलाने वाले सुनील कुमार अपनी पत्नी मीना के साथ एक फरवरी को हमीरपुर से लौट रहे थे। सुनील का आरोप है कि विक्की, पवन और उनके 4-5 साथियों ने उन्हें रास्ते में घेर लिया और लाठी-डंडों से हमला कर दिया। इस हमले में दंपती बुरी तरह घायल हो गया। पीडि़त का कहना है कि आरोपी रसूखदार हैं, जिसके चलते पुलिस कार्रवाई से बच रही है। पुलिस की सीमा और सेक्शन की सियासत
इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:
भोरंज पुलिस (हमीरपुर): घटना के बाद दंपती यहाँ पहुंचा। पुलिस ने मेडिकल तो कराया लेकिन स्नढ्ढक्र दर्ज नहीं की। थाना प्रभारी का तर्क है कि मामला नॉन-कागनीजेबल (असंज्ञेय) था, इसलिए रिपोर्ट का इंतजार किया।
जीरो एफआईआर की अनदेखी: कायदे से भोरंज पुलिस को जीरो स्नढ्ढक्र काटकर मामला बिलासपुर भेजना था, लेकिन उन्होंने केवल कागजात भेज दिए।
भराड़ी पुलिस (बिलासपुर): 4 फरवरी को कागज मिलने के बाद भी भराड़ी पुलिस 3 दिनों तक डॉक्टर के ओपिनियन का इंतजार करती रही।
सीसीटीवी (ष्टष्टञ्जङ्क) ने खोली पोल
शुक्रवार शाम को घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया, जिसमें हमलावर सरेआम डंडों से दंपती को पीटते नजर आ रहे हैं। वीडियो वायरल होने और मीडिया के हस्तक्षेप के बाद अब अधिकारियों के सुर बदले हैं।
अधिकारियों के बयान:
भोरंज पुलिस ने मामला भेजने में तकनीकी गलती की, उन्हें जीरो स्नढ्ढक्र दर्ज करनी चाहिए थी। मैंने भराड़ी पुलिस को आज हर हाल में स्नढ्ढक्र दर्ज करने के निर्देश दे दिए हैं। — संदीप धवल, स्क्क बिलासपुर
अगर किसी स्तर पर मामले को दर्ज करने में देरी हुई है, तो संबंधित पुलिसकर्मियों को इसका स्पष्टीकरण देना होगा। — बलवीर सिंह, स्क्क हमीरपुर
पीडि़त की व्यथा:
पीडि़त सुनील कुमार का कहना है कि उनका दांत टूट चुका है और आंख में गंभीर चोट है, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट और क्षेत्राधिकार के नाम पर उन्हें पिछले 6 दिनों से एक थाने से दूसरे थाने दौड़ाया जा रहा है।
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