-कृषि विवि में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम का समापन
अयोध्या 8 फरवरी (आरएनएस)। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम का शुक्रवार को भव्य समापन हुआ। यह कार्यक्रम संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली तथा सामाजिक संस्था श्री नवदुर्गा ग्रामोत्थान सेवा संस्थान, अमेठी (उत्तर प्रदेश) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि प्रोफेसर एस. पी. सिंह रहे। उन्होंने अपने संबोधन में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों, शिक्षा के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान और राष्ट्रीय एकता के प्रति उनके समर्पण को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने भारत की अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उनका जीवन साहस, सत्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा का प्रतीक है। प्रो. सिंह ने युवाओं से आह्वान किया कि वे डॉ. मुखर्जी के आदर्शों को अपनाकर सशक्त, आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि प्रदीप सिंह थोरी, पूर्व लोकसभा प्रत्याशी, भाजपा अमेठी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का दूरदर्शी नेतृत्व शिक्षा सुधारों और सांस्कृतिक चेतना को प्रोत्साहित करने वाला रहा। उन्होंने राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनके विचार आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। विशिष्ट अतिथि श्री चंद्र मौली सिंह, मीडिया प्रभारी, भाजपा अमेठी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारत की राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे का दृढ़ संदेश देकर देश की अखंडता की रक्षा का संकल्प लिया। प्रोफेसर दिवाकर सिंह ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक प्रख्यात शिक्षाविद थे और कोलकाता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति रहे। उन्होंने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का आधार माना। कश्मीर मुद्दे पर उनका संघर्ष भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। प्रोफेसर देवेंद्र कुमार ने युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करने की उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला, वहीं प्रोफेसर सीताराम मिश्रा ने भारतीय संस्कृति, परंपरा और आधुनिकता के संतुलन पर उनके विचारों को रेखांकित किया। डॉ. विनोद कुमार दुबे ने कहा कि उद्योग मंत्री के रूप में डॉ. मुखर्जी ने औद्योगिक प्रगति और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को आगे बढ़ाया। कार्यक्रम को डॉ. रागिनी मिश्रा, डॉ. शशांक सिंह और डॉ. सत्यव्रत सिंह ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन पर आधारित नाटक का मंचन अवधी लोक समूह समिति, अयोध्या एवं अमेठी लोक गायन समूह द्वारा किया गया। कुमारी संध्या शर्मा द्वारा प्रस्तुत महिषासुर मर्दिनी एवं तांडव नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बीएससी एग्रीकल्चर प्रथम वर्ष के छात्रों द्वारा लोकगीत और कविता पाठ भी प्रस्तुत किया गया।कार्यक्रम का संचालन बिंदेश्वरी प्रसाद दुबे, संस्था सचिव ने किया। निबंध एवं भाषण प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को स्मृति चिन्ह एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
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