डॉ. सुधीर सक्सेना
वह सुदर्शना है। सुशिक्षिता है। युवा और अनुभवी हैं। तत्पर और प्रत्युत्पन्नमति हैं। संसद और बाहर वह मुखर है। कलुष के बेदब दौर में उनकी छवि बेदाग और उजली है। इतनी खूबियों से सुसज्ज शबाना महमूद इन दिनों सुर्खियों में हैं। संप्रति वह ब्रिटेन की सेक्रेट्री फार द होम यानि गृहमंत्री है। एप्सटीन फाइल्स के जेरे-बहस दौर में इस आशय की अटकलों का सब्जा दरो-दीवार और मुंडेरों पर उग आया है कि क्या वह ब्रिटेन की प्रधानमंत्री होंगी। फिलहाल उनके और प्रधानमंत्री पद के दरम्यान एक सोपान का फासला है। यदि वह प्रधानमंत्री बनती हैं, तो वह एशियाई मूल की दूसरी और मुस्लिम संप्रदाय की पहली महिला होंगी। गौरतलब है कि भारतीय मूल के ऋषि सूनक इसके पूर्व ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का पद संभाल चुके है, जबकि शबाना पाकिस्तानी मूल की नेत्री है।
लोकतंत्र के जनक ब्रिटेन में इन दिनों कुख्यात एप्सटीन फाइल्स को लेकर बावेला मचा हुआ है। कई राजनेता पद त्याग को बाध्य हुये हैं। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। यदि दबाव अधिक बढ़ा तो मजबूरन उन्हें इस्तीफा देना पड़ सकता है। इस कयास के मद्देनजर शबाना महमूद के पीएम बनने की संभावना प्रबल है। 45 वर्षीया शबाना सत्तारुढ़ ब्रिटिश लेबर पार्टी की सदस्या और बैरिस्टर हैं। वह पहले पहल सन 2010 में मई के आमचुनाव में बर्मिंघम लेडीवुड से एमपी चुनी गयी थीं। तदंतर वह चुनावों में लगातार विजयी हुई। जीत की हैटट्रिक बना चुकी शबाना ब्रिटिश लेबर पार्टी की अग्रणी नेताओं में शुमार हैं। सन 2024-25 में सेकेट्री फार जस्टिस यानि न्यायमंत्री रहने के बाद गत वर्ष उन्हें गृह जैसा महत्वपूर्ण महकमा सौंपा गया।
17 सितंबर, सन 1980 को बर्मिंघम में जनमी शबाना के परिवार की जड़े पाकअधिकृत काशमीर में मीरपुर में है। माँ जुनेदा और पिता महमूद अहमद की संतान शबाना के दो भाई और एक बहन है। अनमें एक उनका जुड़वा भाई है। सन 1981 से 1986 तक वह परिवार के साथ सऊदी अरब तैफ में रहीं जहां उनके पिता सिविल इंजीनियर थे।
उसके बाद परिवार बर्मिंघम चला आया। पिता जहाँ लेबर गर्टी से जुड़ गये, वहीं मां स्वयं की सुविधा-शॉप का संचालन करने लगीं 11वीं कक्षा में अनुतीर्ण रहने पर वह स्माल हीथ स्कूल और किंग एडवर्ड षष्टम कैंप हिल स्कूल में पढ़ीं। अंतत: उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के अंतर्गत लिंकन कॉलेज से कानून में उपाधि हासिल की। पूर्व पीएम ऋषि सूनक कॉलेज में उनसे एक दर्जा आगे थे और शबाना जूनियर कॉमन रूम के चुनाव में ऋषि ने उन्हें वोट देने का वायदा किया था।
युवा शबाना बर्मिंघम में पिता के राजनीतिक कार्यों में हाथ तो बंटाती थीं, अलबत्ता उनकी ख्वाहिश थी कि वह बैरिस्टर बने। उनकी यह ख्वाहिश पूरी हुई। सन 2010 में जब निवर्तमान सांसद क्लेयर शार्ट ने बर्मिंघम से चुनाव लडऩे की अनिच्छा व्यक्त की तो शबाना ने दावेदारी की होड़ में याई मॉर्स्क्वटो को पीछे छोड़ दिया। इस द्वन्द ने इलाके में जातिीय धड़ेवाजी को को बढ़ावा दिया, वह फिलिस्तीन समर्थक और इस्रायली उत्पादों के बहिष्कार की हिमायती नेत्री के तौर पर उभरीं। विवाद होने पर उन्होंने सतर्कतापूर्वक अपने पाँव पीछे खींच लिये, लेकिन इसने उनकी छवि जियोनिज्म (यहूदीवाद) विरोध की बना दी। वह इस्लाम में गहरी आस्था के लिये भी जानी गयीं और उन्होंने इसे कभी छुपाया नहीं। शबाना, रोशनआरा अली और यास्मीन कुरैशी की तिकड़ी ने बीते दशक में खासी शोहरत कमाई। लेबर नेता जेरेमी कार्बिन्स से मतभेदो को उन्होंने कभी छिपाया नहीं और साहसपूर्वक दायित्व संभालने की पेशकशों को ठुकरा दिया। बहरहाल, सितंबर 2023 में कीर स्टार्मर ने उन्हें शैडो सेक्रेट्री बनाया। सन 2024 के आम चुनाव में उनका मुकाबला निर्दलीय अखमेद याकूब से हुआ, लेकिन वह विजयी रहीं। जुलाई, 2024 उनके लिये नेमत लेकर आई, जब स्टार्मर ने उन्हें न्याय सचिव और लार्ड चांसलर बनाया। इस ओहदे को संभालने वाली वह तीसरी महिला और पहली मुस्लिम थीं।
शबाना दो टूक कहती हैं कि इस्लाम उनका अपना धर्म है और अन्य इस्लाम धर्मावलंबियों की भांति उनके जीवन में आस्था महत्त्वपूर्ण तत्त्व है। यह तत्व उनके समस्त कार्यों का प्रेरक है। अवैध आव्रजन को लेकर शबाना की भावभंगिमा कठोर है और वह अवैध आव्रजकों और दंगाइयों से कठोरता से निपटने में यकीन रखती हैं। उन्हें ब्रिटिश लेबर पार्टी के अनुदार नीले (ब्लू) धड़े की मेंबर के तौर पर देखा और जाना जाता है। एप्सटीन फाइल्स के नामों के उजागर होने के बाद जिस तरह परिस्थितियां बदल रही है, उनसे यह कयास लगाया जा रहा है कि शबाना कल ब्रिटेन की पहली मुस्लिम महिला प्रधानमंत्री हो सकती है
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