युगांतर ’26 में एसआरसीसी जीबीओ डिप्लोमा को पूर्णकालिक मास्टर डिग्री कार्यक्रम में परिवर्तित करने की घोषणा
नई दिल्ली , 20 फरवरी(आरएनएस ) | केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को उच्च शिक्षण संस्थानों से मैकाले की औपनिवेशिक शिक्षा मानसिकता से मुक्त होकर ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के अनुरूप स्वयं को ढालने का आह्वान किया। इसी अवसर पर उन्होंने श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी), दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित दो वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन ग्लोबल बिज़नेस ऑपरेशंस (PGDGBO) को पूर्णकालिक मास्टर डिग्री कार्यक्रम में परिवर्तित करने की औपचारिक घोषणा की। वे एसआरसीसी जीबीओ के वार्षिक प्रबंधन सम्मेलन ‘युगांतर ’26’ का उद्घाटन कर रहे थे, जिसका इस वर्ष का विषय था — “एआई फॉर सस्टेनेबिलिटी एंड स्टार्टअप इनोवेशन”। श्रृधर श्रीराम ऑडिटोरियम में आयोजित उद्घाटन सत्र में शिक्षा मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता योगेश सिंह, कुलपति, दिल्ली विश्वविद्यालय ने की, जबकि आयोजन की मेज़बानी सिमरित कौर, प्राचार्या, एसआरसीसी ने की। इस अवसर पर वरिष्ठ प्राध्यापकगण, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, पूर्व छात्र और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। साथ ही डॉ. मिशा गोविल (जीबीओ समन्वयक), डॉ. सपना बंसल (संयोजक, युगांतर 2026) तथा डॉ. सुनीता शर्मा (सह-संयोजक) भी कार्यक्रम में मौजूद रहीं।युगांतर ’26 के प्रथम दिन कॉर्पोरेट पैनल चर्चाएँ, स्टार्टअप संस्थापकों के सत्र तथा वित्त, विपणन, एनालिटिक्स, एचआर और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े केस सिमुलेशन आयोजित किए गए। शिक्षा मंत्री ने ‘विकसित भारत स्टार्टअप एक्सपो 2026’ का भी अवलोकन किया, जहाँ विद्यार्थियों द्वारा विकसित नवाचार प्रोटोटाइप प्रदर्शित किए गए। एसआरसीसी जीबीओ को मास्टर डिग्री में उन्नत करने की घोषणा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप सुधारों के संकल्प के साथ, ‘युगांतर ’26’ ने विकसित भारत 2047 की व्यापक रूपरेखा में उच्च शिक्षा की निर्णायक भूमिका को रेखांकित किया।

