न्यूयॉर्क ,21 फरवरी । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 और 26 फरवरी को इजरायल की बेहद अहम दो दिवसीय यात्रा पर जा रहे हैं। वैश्विक कूटनीति और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच इस दौरे को भारत और इजरायल की सामरिक व रक्षा साझेदारी के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत की सुरक्षा प्रणाली को अभेद्य बनाना और अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों का हस्तांतरण सुनिश्चित करना है। हालांकि किसी बड़े रक्षा सौदे की औपचारिक घोषणा की संभावना कम है, लेकिन इसका कारण यह है कि दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध अब एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया का रूप ले चुके हैं। आने वाले कुछ ही वर्षों में यह द्विपक्षीय रक्षा सहयोग 10 अरब अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को पार कर जाने की उम्मीद है।
इजरायल साझा करेगा अपनी सबसे गोपनीय तकनीक
सूत्रों की मानें तो इस बार इजरायल अपनी सबसे गोपनीय और अत्याधुनिक रक्षा तकनीकें भारत के साथ साझा करने को राजी हो गया है। इसमें हाई-टेक लेजर डिफेंस सिस्टम और स्टैंड-ऑफ मिसाइल सिस्टम जैसी घातक प्रणालियां शामिल हैं। यह वैश्विक स्तर पर पहली बार है जब इजरायल इन तकनीकों को किसी अन्य देश के साथ साझा करने जा रहा है। इस ऐतिहासिक और विस्तारित सहयोग की मजबूत नींव पिछले साल नवंबर में रक्षा सचिव आर.के. सिंह की इजरायल यात्रा के दौरान ही रख दी गई थी।
‘मिशन सुदर्शनÓ से सुरक्षित होगा भारतीय आसमान
इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक पहलू ‘मिशन सुदर्शनÓ है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू किए गए इस मिशन का मुख्य लक्ष्य भारतीय सरजमीं को दुश्मन की लंबी दूरी की मिसाइलों से पूरी तरह सुरक्षित करना है। भारत अब इजरायल के साथ मिलकर एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के संयुक्त विकास पर तेजी से काम कर रहा है। इजरायल इस क्षेत्र में निर्विवाद रूप से विश्व का नेतृत्व करता है। उसके पास लंबी दूरी की ‘एरोÓ, मध्यम दूरी की ‘डेविल्स स्लिंगÓ और छोटी दूरी की ‘आयरन डोमÓ जैसी अचूक प्रणालियां हैं। बीते साल ईरान द्वारा दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों को 98 प्रतिशत तक हवा में ही नष्ट करके इजरायल ने अपनी इस तकनीक का लोहा मनवाया था। भारत भी इसी तकनीक के जरिए अपने आकाश को पूरी तरह अभेद्य बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है।
‘ऑपरेशन सिंदूरÓ की सफलता और नए हथियारों की तैयारी
हाल ही में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूरÓ में भारत ने इजरायली हथियारों का जबरदस्त इस्तेमाल किया था। रैम्पेज मिसाइल, पाम 400 और हारपी जैसे ‘कामिकेजÓ ड्रोन के अचूक प्रहार से पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों और उनके एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया गया था। इसी शानदार सफलता को आधार बनाते हुए भारत अब कई नई प्रणालियों की खरीद और विस्तार पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इनमें लंबी दूरी के गाइडेड बम स्पाइस 1000, हवा से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल एयर लोरा और लंबी दूरी की अत्याधुनिक मिसाइल प्रणाली आइस ब्रेकर शामिल हैं। इसके साथ ही भारतीय नौसेना के युद्धपोतों को हवाई हमलों से बचाने के लिए विस्तारित दूरी वाली मिसाइल बराक ईआर को भी बेड़े में शामिल करने की तैयारी है।
कूटनीति के साथ-साथ तकनीक और कृषि पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच के गहरे व्यक्तिगत संबंधों ने दोनों देशों को राजनीतिक रूप से भी बेहद करीब ला दिया है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ हमेशा एक मजबूत आवाज बनकर उभरते हैं। रक्षा के अलावा इस यात्रा के दौरान कई अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर भी गंभीर चर्चा होनी है। भविष्य की तकनीक में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए क्वांटम कंप्यूटिंग पर बातचीत होगी। वहीं, कृषि और जल प्रबंधन के क्षेत्र में इजरायल की प्रसिद्ध बूंद-बूंद सिंचाई तकनीक और समुद्री खारे पानी को पीने योग्य बनाने की तकनीक पर भी नए समझौते होने की पूरी उम्मीद है। इसके अलावा दोनों देशों के वैज्ञानिकों के बीच संयुक्त शोध को बढ़ावा देने पर भी सहमति बन सकती है। यह दौरा महज दो नेताओं की मुलाकात नहीं है, बल्कि लेजर हथियारों से लेकर लंबी दूरी की मारक क्षमता तक, भारत और इजरायल का यह गठबंधन एशिया में शक्ति संतुलन को पूरी तरह से बदलने का माद्दा रखता है।
00
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

