मुनाफे के लिए सही बीज का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण
20 से 28 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान होती है पौधों की वृद्धि
बस्ती 22 फरवरी (आरएनएस)। पारंपरिक खेती के बजाय अब किसान नकदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसमें टमाटर की खेती सबसे ऊपर उभर कर आई है। कम समय, कम लागत और बाजार में साल भर रहने वाली मांग के कारण टमाटर किसानों के लिए समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया जाए, तो एक एकड़ से ही लाखों की कमाई संभव है। टमाटर की खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे उत्तम मानी जाती है। हालांकि, जल निकासी की अच्छी व्यवस्था होने पर इसे विभिन्न प्रकार की मिट्टियों में उगाया जा सकता है। इसके लिए 20 से 28 डिग्री सेंटीग्रेड का तापमान पौधों की वृद्धि और फलों के अच्छे रंग के लिए आदर्श होता है। बीजों को सीधे खेत में लगाने के बजाय पहले नर्सरी तैयार करनी चाहिए। करीब 25-30 दिन बाद जब नर्सरी के पौधे 10-15 सेमी के हो जाएं, तब उन्हें मुख्य खेत में रोपना चाहिए। टमाटर के पौधों को बांस या तार के सहारे बांधने से फल मिट्टी के संपर्क में नहीं आते, जिससे वे सडऩे से बच जाते हैं। टमाटर की खेती जोखिम भरी तो हो सकती है (बाजार भाव के उतार-चढ़ाव के कारण), लेकिन सही समय पर बुवाई और बेहतर विपणन रणनीति से यह खेती किसी भी अन्य पारंपरिक फसल की तुलना में कई गुना अधिक मुनाफा देने की क्षमता रखती है।
मुनाफे के लिए सही बीज का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण है। बाजार में कई हाइब्रिड किस्में उपलब्ध हैं जो रोगों के प्रति सहनशील हैं और अधिक पैदावार देती हैं। प्रमुख किस्में अर्का रक्षक, अभिलाष, हिमसोना, और पूसा हाइब्रिड-4। होती हैं। टमाटर की खेती साल में तीन बार (खरीफ, रबी और जायद) की जा सकती है। एक एकड़ में टमाटर 200 ग्राम बीच की जरूरत होती है।
: भानुप्रताप तिवारी योजना प्रभारी, जिला उद्यान बस्ती
काउंसलिंग कर एसएचओ ने बिखरने से बचाए दो आशियाने
बस्ती: पुलिस का काम केवल अपराधियों को पकडऩा ही नहीं, बल्कि समाज के टूटे हुए रिश्तों को जोडऩा भी है। इसकी मिसाल पेश की है स्थानीय महिला थाना प्रभारी डा.शालिनी सिंह ने, अपनी सूझबूझ और धैर्यपूर्ण काउंसलिंग के जरिए उन्होंने दो ऐसे परिवारों को टूटने से बचा लिया, जिनके मामले तलाक की दहलीज तक पहुंच चुके थे। पहले मामले में, एक युवा दंपत्ति के बीच आपसी तालमेल की कमी को लेकर पिछले कई महीनों से विवाद चल रहा था। बात इतनी बढ़ गई थी कि दोनों अलग रहने लगे थे और मामला थाने तक पहुंच गया था। वहीं, दूसरे मामले में सास-बहू के झगड़े और बाहरी हस्तक्षेप के कारण एक वैवाहिक जीवन में कड़वाहट आ गई थी। दोनों ही मामलों में पति-पत्नी एक-दूसरे के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने पर आमादा थे।
थानेदार बनीं रिश्तों की डाक्टर
महिला थाना प्रभारी ने दोनों पक्षों की शिकायतों को सुनने के बाद तुरंत एफआईआर दर्ज करने के बजाय उन्हें समझाने का रास्ता चुना। कई दौर की व्यक्तिगत काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक चर्चा के बाद, थानेदार ने दोनों जोड़ों को उनकी गलतियों का एहसास कराया। उन्होंने उन्हें समझाया कि एक छोटा सा समझौता और अहंकार का त्याग एक पूरे परिवार को बिखरने से बचा सकता है। एसएचओ ने कहा कि आपरेशन साथ-साथ अभियान के तहत पुलिस का उद्देश्य केवल कानूनी कार्रवाई करना नहीं, बल्कि परिवारों को जोडऩा है। जब एक परिवार टूटता है, तो उसका सबसे बुरा असर बच्चों और समाज पर पड़ता है। अक्सर देखा जाता है कि छोटे-मोटे मनमुटाव कानूनी पेचीदगियों में फंसकर बड़े विवाद बन जाते हैं।
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

