लखनऊ 22 फरवरी (आरएनएस ) । उत्तर प्रदेश के दुग्धशाला विकास विभाग द्वारा 23 फरवरी 2026 को पूर्वाह्न 10:30 बजे से गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मार्स सभागार में ‘गोधन समागम-2026Ó का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम कैबिनेट मंत्री, दुग्ध विकास, पशुधन एवं राजनैतिक पेंशन धर्मपाल सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न होगा।समारोह में वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए चयनित 63 गोकुल पुरस्कार एवं 49 नन्द बाबा पुरस्कार के लाभार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही निराश्रित गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन में उत्कृष्ट कार्य करने वाली गौशालाओं को भी सम्मान पत्र प्रदान किए जाएंगे। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव, पशुधन, दुग्ध एवं मत्स्य विकास मुकेश मेश्राम तथा प्रबंध निदेशक, पीसीडीएफ वैभव श्रीवास्तव सहित विभागीय अधिकारी, विषय विशेषज्ञ, उद्यमी, किसान एवं पशुपालक उपस्थित रहेंगे।समागम में स्वदेशी नस्ल के गौ-पालन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण, नस्ल सुधार, पशु पोषण और पशु स्वास्थ्य जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। विशेषज्ञों द्वारा आधुनिक दुग्ध उत्पादन तकनीकों, हरे चारे के प्रबंधन तथा गौवंश आश्रय स्थलों को उत्पादक एवं स्वावलंबी बनाने के उपायों पर भी प्रस्तुतिकरण दिया जाएगा।कार्यक्रम के प्रथम सत्र में गोधन प्रदर्शनी, गोकुल एवं नन्द बाबा पुरस्कार वितरण, दुग्ध उत्पादन तकनीकों पर प्रस्तुति, उत्कृष्ट निराश्रित गौ-आश्रय स्थलों को सम्मान पत्र तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली के माध्यम से पुरस्कार धनराशि का वितरण किया जाएगा। द्वितीय सत्र में गौ-आधारित अर्थव्यवस्था पर संगोष्ठी, पशु आहार एवं पोषण पर चर्चा, स्वदेशी गौपालन के महत्व तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका पर विस्तार से विचार साझा किए जाएंगे।दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. जी. ने बताया कि गोकुल पुरस्कार का उद्देश्य दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हेतु कृषकों को प्रोत्साहित करना है। इसके लिए वे दुग्ध उत्पादक पात्र होते हैं जिन्होंने वित्तीय वर्ष में कम से कम 5000 लीटर या उससे अधिक दूध दुग्ध समिति को आपूर्ति किया हो। प्रदेश स्तर पर सर्वाधिक दुग्ध आपूर्ति करने वाले उत्पादकों को राज्य स्तरीय पुरस्कार तथा अन्य चयनित उत्पादकों को जनपद स्तरीय पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं।नन्द बाबा पुरस्कार के अंतर्गत भारतीय गोवंश की गाय के दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु उन कृषकों को सम्मानित किया जाता है जिन्होंने वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 1500 लीटर या उससे अधिक दूध दुग्ध समिति को उपलब्ध कराया हो। इस पहल का उद्देश्य स्वदेशी नस्ल के संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है।

