मुंबई,23 फरवरी। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी डॉलर की कीमतों में आई भारी गिरावट के चलते आज भारतीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमती धातुओं की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी गई. सोमवार को घरेलू बाजार (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी के भाव रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ते नजर आए.
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अप्रैल वायदा सोने की कीमतों में 1.83 प्रतिशत की बढ़त देखी गई, जिससे यह 1,59,749 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया. इंट्रा-डे ट्रेडिंग के दौरान इसमें 2 प्रतिशत तक का उछाल दर्ज किया गया था. वहीं, चांदी ने और भी आक्रामक रुख दिखाया. चांदी का मार्च वायदा 5.10 प्रतिशत की छलांग लगाकर 2,65,836 रुपये प्रति किलोग्राम पर जा पहुंचा. दिन के शुरुआती कारोबार में चांदी में 6 प्रतिशत तक की तेजी देखी गई थी.
सोमवार को एमसीएक्स पर चांदी का मार्च वायदा ?2,52,836 (शुक्रवार की क्लोजिंग) से बढ़कर ?2,65,836 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया. यह सीधा ?13,000 का भारी अंतर है. मोतीलाल ओसवाल के अनुसार, इंट्रा-डे में यह तेजी 6 प्रतिशत तक चली गई थी.
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस तेजी का सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को सार्थक समझौते के लिए दी गई 10 दिनों की समय सीमा समाप्त होने वाली है. हालांकि ईरान ने प्रतिबंधों को हटाने के बदले परमाणु कार्यक्रम पर रियायत देने के संकेत दिए हैं, लेकिन युद्ध की आशंका ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर धकेल दिया है.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ (शुल्कों) के एक बड़े हिस्से को रद्द करने के फैसले के बाद डॉलर इंडेक्स में गिरावट आई है. डॉलर कमजोर होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना सस्ता हो जाता है, जिससे इसकी मांग बढ़ जाती है.
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी की वैश्विक आपूर्ति में भारी कमी देखी जा रही है. कॉमेक्स जैसे बड़े गोदामों से इन्वेंट्री में बड़ी गिरावट आई है, जबकि चीन के बाजार बंद होने से मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ गया है.
अमेरिका की जीडीपी वृद्धि दर चौथी तिमाही में गिरकर 1.4 प्रतिशत रह गई है, जो पिछली तिमाहियों (4.4 प्रतिशत और 3.8 प्रतिशत) के मुकाबले काफी कम है. आर्थिक सुस्ती के डर ने भी सोने की चमक बढ़ा दी है.
बाजार की नजर अब अमेरिका के फैक्ट्री ऑर्डर्स, उपभोक्ता विश्वास सूचकांक और प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स के आंकड़ों पर है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा. सोने के लिए 1,60,600 रुपये और चांदी के लिए 2,63,620 रुपये प्रमुख रेजिस्टेंस स्तर बने हुए हैं.
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