नई दिल्ली 06 March, (Rns): अगर आपको लगता है कि सिर्फ व्हाट्सएप या एसएमएस पर हुई तीखी बहस के आधार पर किसी भी रिश्ते को कानूनी तौर पर खत्म किया जा सकता है, तो बॉम्बे हाई कोर्ट का यह ताजा फैसला आपको जरूर पढ़ना चाहिए। हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि महज व्हाट्सएप चैट्स दिखाकर तलाक नहीं लिया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने नासिक फैमिली कोर्ट के उस आदेश को भी सिरे से पलट दिया है, जिसमें एक पति को सिर्फ उसकी पत्नी के व्हाट्सएप मैसेज में झलकी कथित क्रूरता के आधार पर तलाक दे दिया गया था।
फैमिली कोर्ट ने सुनाया था एकतरफा फैसला
यह पूरा मामला हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13(1)(ia) के तहत क्रूरता के आधार पर तलाक से जुड़ा हुआ है। नासिक फैमिली कोर्ट ने मई 2025 में इस मामले में सुनवाई करते हुए सिर्फ व्हाट्सएप और एसएमएस चैट्स पर भरोसा करके पति के पक्ष में फैसला सुना दिया था। फैमिली कोर्ट ने पति की गवाही को बिना किसी विरोध के सही मान लिया था क्योंकि यह मामला एकतरफा चला था और इसमें पत्नी को अपना पक्ष रखने या सुनवाई का कोई मौका ही नहीं दिया गया था।
पति ने लगाया था मानसिक प्रताड़ना का आरोप
इस विवाद में पति ने दावा किया था कि उसकी पत्नी उसे और उसके परिवार को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही है। कोर्ट में पेश की गई चैट्स के आधार पर यह तर्क दिया गया कि पत्नी बार-बार नासिक छोड़कर पुणे शिफ्ट होने की जिद कर रही थी और अपने सास-ससुर के साथ नहीं रहना चाहती थी। इसके अलावा, पत्नी पर ननद और सास के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने, इमोशनल ब्लैकमेल करने और पति पर दबाव बनाने के आरोप भी लगाए गए थे। इन आरोपों को सही मानते हुए फैमिली कोर्ट ने तलाक की मंजूरी दे दी थी।
हाई कोर्ट ने कहा- सिर्फ चैट अकेले काफी नहीं
इस एकतरफा फैसले की जब हाई कोर्ट ने जांच की, तो जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजुषा देशपांडे की बेंच ने 27 फरवरी को इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया। जजों ने अपनी सख्त टिप्पणी में कहा कि महज व्हाट्सएप चैट्स पर निर्भर रहकर तलाक जैसा संवेदनशील फैसला नहीं सुनाया जा सकता, क्योंकि इसे ठीक से सबूत के तौर पर पेश नहीं किया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि क्रूरता साबित करने के लिए ठोस सबूत पेश करना और क्रॉस-एग्जामिनेशन होना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने मामला वापस उसी फैमिली कोर्ट को भेज दिया है, ताकि अब दोनों पक्षों को सबूत पेश करने और बहस करने का पूरा मौका मिल सके।

