बलौदाबाजार 17 मार्च (आरएनएस)स्कूलों में अनुशासनहीनता, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और खतरनाक स्टंट जैसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए बलौदाबाजार पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता की मौजूदगी में आयोजित संयुक्त बैठक में साफ संकेत दिया गया कि अब स्कूलों में सुरक्षा और अनुशासन को लेकर कोई समझौता नहीं होगा।
पुलिस कम्युनिटी हॉल में आयोजित इस बैठक में जिलेभर के करीब 130 प्राचार्य और प्रभारी प्राचार्य शामिल हुए। बैठक का केंद्र बिंदु छात्रों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करना, अपराध की प्रवृत्तियों को शुरुआती स्तर पर रोकना और पुलिस, स्कूल व अभिभावकों के बीच मजबूत समन्वय स्थापित करना रहा।
पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता ने प्राचार्यों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे छात्रों की गतिविधियों, व्यवहार और आदतों पर लगातार नजर रखें। उन्होंने कहा कि स्कूल केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण का सबसे अहम स्थान है, इसलिए शिक्षकों की भूमिका और जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उन्होंने चेताया कि शाला प्रवेश या विदाई जैसे आयोजनों के नाम पर स्टंट और नियमों की अवहेलना किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में सामने आया कि स्कूलों में छात्रों द्वारा चाकू जैसे धारदार हथियार लाना, नशे की सामग्री का उपयोग, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना और सोशल मीडिया के लिए खतरनाक वीडियो बनाना जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए स्कूल बैग की आकस्मिक जांच, संदिग्ध व्यवहार वाले छात्रों की नियमित काउंसलिंग, अभिभावकों के साथ संवाद और स्कूल परिसरों में सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने जैसे उपायों पर सहमति बनी।
किशोर न्याय बोर्ड की सदस्य अपर्णा सर्राफ और परिवीक्षा अधिकारी नेहा शर्मा ने भी प्राचार्यों को छात्रों की मानसिक स्थिति और उनकी व्यक्तिगत क्षमताओं को समझने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर छात्र अलग होता है, इसलिए उसके व्यवहार और रुचियों के अनुसार मार्गदर्शन जरूरी है।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि नाबालिग छात्रों को वाहन चलाकर स्कूल आने पर सख्ती से रोक लगाई जाएगी और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी। पुलिस अधिकारियों और शिक्षकों ने मिलकर जोखिम वाले छात्रों की पहचान कर उनकी काउंसलिंग करने का निर्णय लिया।

यह बैठक केवल चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक स्पष्ट रोडमैप के साथ समाप्त हुई। संदेश साफ है—अगर स्कूल, पुलिस और अभिभावक मिलकर जिम्मेदारी निभाएं, तो बच्चों को अपराध और भटकाव से बचाया जा सकता है।

