बिलासपुर, 18 मार्च (आरएनएएस)। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित पेंडारी नसबंदी कांड में 11 साल 4 महीने बाद जिला अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. आरके गुप्ता को लापरवाही और गैर-इरादतन हत्या का दोषी पाते हुए 2 साल की कैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। उक्त फैसला एडीजे शैलेश कुमार की कोर्ट ने सुनाया है।
बता दें कि नवंबर 2014 में जिले के तखतपुर ब्लॉक में नसबंदी शिविर लगा था। जहां सरकारी लक्ष्य को पूरा करने के लिए सिर्फ 3 घंटे के भीतर 83 ऑपरेशन कर दिए गए थे, जिसके बाद 15 माताओं की मौत हो गई थी और 100 से अधिक महिलाएं अस्पताल पहुंच गई थीं। इस कांड ने न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। बताया जाता है कि डॉक्टर गुप्ता पर आरोप था कि उन्होंने बिना किसी सुरक्षा मानक के मशीनी अंदाज में एक प्रशिक्षु के साथ मिलकर औसतन हर 2 मिनट में एक महिला का ऑपरेशन किया। शिविर में शाम होते तक महिलाओं को उल्टी, तेज बुखार और दर्द शुरू हो गया। देखते ही देखते सिम्स और अपोलो अस्पताल में दर्द से तड़पती महिलाओं की लाईन लग गई थी।
मामले की जांच में पुलिस ने सिप्रोसिन दवा में चूहामार दवा (जिंक फ ास्फ ाइड) की मिलावट का दावा किया था। दवा सप्लाई करने वाली कंपनी के संचालकों को भी आरोपी बनाया गया था, हालांकि, अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया है।

