भोपाल 27 मार्च (आरएनएस)।मध्यप्रदेश में मोहन सरकार भारतीय ज्ञान परंपरा और गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। गौरवमयी अभियान विक्रमोत्सव-2026 के अंतर्गत, मोक्षदायिनी नगरी वाराणसी में आगामी 3 से 5 अप्रैल 2026 तक भव्य महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य का मंचन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विशेष रुचि और दूरदर्शी सोच का परिणाम है कि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से शुरू हुई यह सांस्कृतिक यात्रा अब बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी पहुँच रही है।
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का महाकुंभ-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य केवल एक शासक नहीं, बल्कि भारतीय न्यायप्रियता, वीरता और सुशासन के जीवंत प्रतीक हैं। वाराणसी में होने वाला यह महानाट्य जन-जन को उस वैभवशाली कालखंड से परिचित कराएगा। जब सम्राट विक्रमादित्य ने आज से लगभग 2100 वर्ष पूर्व आक्रांता शकों का समूल नाश कर ‘विक्रम संवतÓ का प्रवर्तन किया था, यह संवत विश्व की प्राचीनतम काल-गणनाओं में से एक है, जो भारतीय विज्ञान और खगोल शास्त्र की श्रेष्ठता को दर्शाता है।
अद्वितीय शौर्य और न्याय का चित्रण-वाराणसी में होने वाली तीन दिवसीय विक्रमादित्य महानाट्य के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के ‘शकारिÓ और ‘साहसांकÓ बनने की गाथा को जीवंत किया जाएगा। नाटक में दिखाया जाएगा कि कैसे एक लोक-कल्याणकारी राजा ने अपने राजकोष से धन देकर प्रजा को ऋणमुक्त किया और एक ऐसा साम्राज्य स्थापित किया जहाँ न कोई दरिद्र था और न ही कोई दुखी। साथ ही, सम्राट की ‘नवरत्नÓ परंपरा—जिसमें कालिदास, वराहमिहिर और धन्वंतरि जैसे महान विद्वान शामिल थे—के माध्यम से ‘श्रेष्ठ भारतÓ के निर्माण के संकल्प को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। दिल्ली के लाल किले पर सफल मंचन और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इसकी सराहना के बाद, वाराणसी का यह मंचन एक नया मील का पत्थर साबित होगा।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विक्रमोत्सव की ऐतिहासिक सफलता-उल्लेखनीय है कि उज्जैन में आयोजित ‘विक्रमोत्सव 2026Ó ने डिजिटल आउटरीच में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ की रिपोर्ट के अनुसार, 7 फरवरी से 24 मार्च 2026 के बीच इस आयोजन की डिजिटल रीच 17.72 करोड़ से अधिक रही है। सोशल मीडिया पर प्त1द्बद्मह्म्ड्डद्वह्वह्लह्यड्ड12026 जैसे हैशटैग्स ने वैश्विक स्तर पर ट्रेंड किया, जिससे सिद्ध होता है कि युवा पीढ़ी अपनी जड़ों की ओर लौटने को आतुर है।
महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ और मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह महानाट्य वाराणसी में न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करेगा, बल्कि राष्ट्रीय एकता के सूत्र को और अधिक सुदृढ़ करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के संकल्पों के अनुरूप यह आयोजन ‘विकसित भारतÓ की राह में ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरणÓ का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

