सिरसा 29 मार्च (आरएनएस)। राजकीय राष्ट्रीय महाविद्यालय, सिरसा के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा उच्चतर शिक्षा विभाग के प्रायोजन से व्यापार, विकास और पर्यावरण: उभरती चुनौतियाँ और अवसर विषय पर अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ सरस्वती वंदना के साथ हुआ, जिसके पश्चात महाविद्यालय का ध्येय गीत प्रस्तुत किया गया।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शत्रुजीत ने स्वागत भाषण में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि इस प्रकार के सेमिनार विद्यार्थियों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा उभरते हुए विषयों पर अकादमिक चर्चा के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करते हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मीत द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में विकास की दौड़ में पर्यावरण की उपेक्षा पर चिंता व्यक्त की तथा यह प्रश्न उठाया कि सतत विकास के लिए नीतिनिर्माण की प्रक्रिया को राजनीतिक प्रभाव से किस प्रकार अलग किया जा सकता है।
इसके पश्चात डॉ. राजदीप ने मुख्य वक्ता प्रो. मनोज सिवाच, चौधरी देवीला(ल विश्वविद्यालय, सिरसा का परिचय कराया। प्रो. सिवाच ने बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में विकास और स्थिरता: उभरती चुनौतियाँ और अवसर विषय पर अपना मुख्य वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आज विकास का केंद्रीय प्रश्न यह है कि क्या बढ़ते हुए अंतर्विरोधों के बीच विकास सतत रह सकता है? उन्होंने अपने व्याख्यान को तीन भागों—वैश्विक परिप्रेक्ष्य, विश्लेषणात्मक कोर एवं संश्लेषण—में विभाजित करते हुए आर्थिक, तकनीकी, व्यापारिक एवं पारिस्थितिक परिवर्तनों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया। साथ ही उन्होंने विकास बनाम असमानता, तकनीक बनाम रोजगार तथा विस्तार बनाम पारिस्थितिकी जैसे प्रमुख अंतर्विरोधों को रेखांकित किया।
चाय अवकाश के पश्चात प्लेनरी सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला के सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रो. बलविंदर सिंह टिवाना ने मुख्य वक्तव्य दिया। डॉ. इन्द्रा जाखड़ ने उनका परिचय श्रोताओं से कराया। प्रो. टिवाना ने अपने संबोधन में कहा कि विभिन्न देशों के बीच प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण की होड़ यह दर्शाती है कि सतत विकास में इन संसाधनों का कितना महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था में डॉलर के अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा के रूप में स्थापित होने की प्रक्रिया, क्चक्रढ्ढष्टस् के गठन, डी-डॉलराइजेशन की अवधारणा, वर्तमान परिदृश्य तथा प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण में शक्ति की भूमिका का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया।
इसके पश्चात दोपहर 12:30 से 2:30 बजे तक चार समानांतर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें तीन ऑफलाइन एवं एक ऑनलाइन माध्यम से आयोजित हुआ। ऑनलाइन सत्र का संचालन डॉ. अमनदीप द्वारा किया गया। एक तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. प्रेम चंद कम्बोज (सेवानिवृत्त प्राचार्य) ने की, जिसमें उन्होंने विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में कौशल असंतुलन: भारत के संदर्भ में एक अध्ययन विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत करते हुए कहा कि कौशल असंगति विकासशील देशों, विशेषकर भारत में, एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।
इसी सत्र में प्रो. सुरेन्द्र कुमार ने महिला श्रम बल भागीदारी के चालक के रूप में ‘देखभाल अर्थव्यवस्थाÓ: एक आर्थिक एवं नीतिगत विश्लेषण” विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत किया और बताया कि ‘देखभाल अर्थव्यवस्था समावेशी विकास का प्रमुख चालक है तथा बिना वेतन वाले देखभाल कार्य में कमी महिला श्रम शक्ति भागीदारी को बढ़ाने में सहायक है। एक अन्य तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. विक्रमजीत सिंह (राजकीय महिला महाविद्यालय, सिरसा) द्वारा की गई। एक अन्य तकनीकी सत्र की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शत्रुजीत सिंह द्वारा की गई। इस सेमिनार में देश- विदेश से 85 से अधिक प्रतिनिधियों ने विभिन्न विषयों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
दोपहर के भोजन के पश्चात विशिष्ट वक्ता सत्र का आयोजन गूगल मीट के माध्यम से किया गया, जिसमें ऑक्सफोर्ड ब्रूक्स विश्वविद्यालय, यूके के एमेरिटस प्रोफेसर डॉ. प्रीतम सिंह ने अपने विचार प्रस्तुत किए। डॉ. सत्य पाल ने उनका परिचय कराया। डॉ. सिंह ने वैश्विक, भारतीय एवं विशेष रूप से पंजाब के संदर्भ में विकास और सततता की यात्रा का विश्लेषण किया। डॉ. अमनदीप के प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने व्यवहार से समाज में सततता के प्रति जागरूकता एवं जिम्मेदारी विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। डॉ. अमनदीप ने उनके व्याख्यान के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
समापन सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. अभय सिंह गोदारा उपस्थित रहे, जिनका परिचय सेमिनार के संयोजक प्रो. सुरेन्द्र कुमार ने कराया। प्रो. गोदारा ने कहा कि सेमिनार का विषय वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक है तथा उन्होंने कृषि क्षेत्र में सततता से संबंधित चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
अंत में प्रो. सुरेन्द्र कुमार ने सभी वक्ताओं, प्रतिनिधियों एवं महाविद्यालय स्टाफ का धन्यवाद ज्ञापित किया। सेमिनार का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। यह जानकारी कॉलेज के प्रवक्ता डॉ. रमेश सोनी द्वारा प्रदान की गई है।
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