देहरादून,29 मार्च (आरएनएस)। एसटीएफ और साइबर क्राइम थाना पुलिस ने साइबर ठगों को बैंक खाते बेचने वाले गिरोह का खुलासा किया है। आम लोगों के नाम पर बैंक खाते खोलकर उन्हें साइबर ठगों को बेचते में तीन आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। इन खातों के जरिए देशभर में लाखों रुपये की साइबर ठगी की रकम का लेनदेन हुआ। एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि एएसपी कुश मिश्रा के नेतृत्व में शनिवार को हरिद्वार में कार्रवाई की गई। इस दौरान रवि उम्र 31 पुत्र अशोक कुमार निवासी नवोदयनगर कालोनी रोशनाबाद मूल निवासी नवल सुरजपुर थाना किठोड, मेरठ, राजन चौधरी उम्र 35 वर्ष पुत्र ओम प्रकाश हाल निवासी प्रेमपुरी मोटामहादेव नजीबाबाद रोड थाना नजीबादबाद मूल निवासी कृपाल आश्रम शिवालिकनगर थाना सिडकुल, हरिद्वार और विनीत राणा उम्र 25 वर्ष पुत्र धीर सिंह निवासी मथाना, दाबकी कला थाना खानपुर, हरिद्वार को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में सामने आया कि ये आरोपी आम लोगों को झांसे में लेकर उनके नाम पर फर्जी कंपनी या फर्म तैयार करते। फिर उस कंपनी या फर्म के नाम पर बैंकों में कॉर्पोरेट या करंट अकाउंट खुलवाते। इन खातों की पासबुक, चेकबुक और एटीएम कार्ड रोडवेज बसों या अन्य माध्यमों से दिल्ली में बैठे साइबर अपराधियों तक पहुंचाए जाते थे। आरोपियों के पास से एक कार, पांच मोबाइल फोन, 10 डेबिट कार्ड, तीन पासबुक, तीन चेकबुक, पांच पेन कार्ड, तीन आधार कार्ड और अलग-अलग फर्मों की पांच फर्जी मुहर बरामद हुई हैं। आरोपियों के खिलाफ साइबर थाना देहरादून में रविवार को अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज किया गया।—म्यूल एकाउंट कहलाते हैं ऐसे खातेगरीब लोगों को लालच देकर उनके नाम पर कंपनी बनाकर जो बैंक खाते खोलकर साइबर ठगों को बेचे जाते हैं, उन्हें म्यूल एकाउंट कहते हैं। एएसपी कुश मिश्रा ने बताया कि इनका उपयोग साइबर अपराधी रकम जमा कराने के लिए करते हैं। इसमें असली खाताधारक को भनक भी नहीं होती कि उसके खाते से लाखों की ठगी का लेनदेन हो रहा है। जब पुलिस जांच करती है, तो असली ठग छिप जाते हैं और फंदा निर्दोष खाताधारक के गले में पड़ता है।
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