इस्लामाबाद ,31 मार्च,। तेल और गैस संकट के बीच पाकिस्तान सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए अवैध भंडारण, चोरी और तस्करी को आतंकवाद की श्रेणी में लाने का फैसला किया है। इस संबंध में सोमवार को नेशनल असेंबली में आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया गया।
डॉन अखबार के अनुसार, सरकार का कहना है कि तेल माफिया पहले तेल ठिकानों और पाइपलाइनों पर हमले करते हैं और फिर चोरी कर उसे ऊंचे दामों पर बेचते हैं। इससे होने वाली कमाई का इस्तेमाल देश में आतंक फैलाने के लिए किया जाता है।
इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून लाने का निर्णय लिया है। प्रस्तावित कानून के तहत तेल और गैस की चोरी, अवैध भंडारण और तस्करी को गंभीर आपराधिक अपराध माना जाएगा और जरूरत पडऩे पर आरोपियों पर आतंकवाद निरोधक कानून भी लगाया जा सकेगा।
इस बीच, सोमवार को बलूचिस्तान में एक तेल पाइपलाइन पर हमले की खबर सामने आई, जिसके चलते क्वेटा सहित कई इलाकों में आपूर्ति बाधित हो गई। हालांकि, हमले के पीछे किसका हाथ है, इस पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
प्रस्तावित कानून की प्रमुख बातें
1. तेल या गैस की चोरी करते पकड़े जाने पर आरोपी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होगा, जिसमें 14 साल तक की सजा और 3 करोड़ रुपये तक जुर्माना हो सकता है।
2. तेल और गैस की तस्करी या अवैध भंडारण पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। पेट्रोलियम पाइपलाइन पर हमले के मामलों में भी कड़ी कार्रवाई होगी।
3. आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए वारंट की आवश्यकता नहीं होगी; अधिकारी स्वत: कार्रवाई कर सकेंगे।
4. कानून में इन अपराधों को आतंकवाद से जुड़े मामलों की तरह सख्ती से निपटाने का प्रावधान किया गया है, जहां न्यूनतम सजा 14 साल तक हो सकती है।
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