नईदिल्ली,01 अपै्रल (आरएनएस)। लोकसभा में बुधवार को बजट सत्र के दौरान विपक्ष ने विदेशी चंदा (विनियमन) संशोधन विधेयक (एफसीआरए) को लेकर जोरदार हंगामा किया। सदन में व्यवधान और बढ़ते राजनीतिक विरोध के बाद बुधवार को निर्धारित समय पर विधेयक को लोकसभा में पेश नहीं किया गया। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसकी जानकारी सदन में दी। बता दें कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने 25 मार्च को लोकसभा में विधेयक पेश किया था, जिस पर आज बहस होनी थी।
रिजिजू ने लोकसभा कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी पर विधेयक के बारे में गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, एफसीआरए के बारे में वास्तव में गलत जानकारी फैलाई जा रही है। संशोधनों का उद्देश्य विदेशी अंशदानों को विनियमित करना और राष्ट्रीय हित और राष्ट्रीय सुरक्षा में उनके उपयोग को सुनिश्चित करना है। यह किसी धर्म या संगठन के खिलाफ नहीं है। कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी चुनावों को देखते हुए केरल की जनता को गुमराह कर रही हैं।
संशोधन विधेयक को लेकर सड़क से संसद तक हंगामा चल रहा है। विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में भी बैनर के साथ प्रदर्शन किया है। केरल में भी कांग्रेस और वामदल इसको मुद्दा बना रहे हैं। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर इस विधेयक को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने लिखा कि ये विधेयक भाजपाई राजनीति की अलोकतांत्रिक, अति नियंत्रणवादी एकाधिकारी सोच है जो एनजीओ पर अवांछित नियंत्रण करके, उन्हें अपनी कठपुतली बनाना चाहती है।
संशोधन के तहत अब लोक सेवकों को विदेशी फंडिंग प्राप्त करने से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है, जिसमें लोक सेवक की परिभाषा इतनी व्यापक है कि यह स्वतंत्र शोधकर्ताओं और सलाहकारों को भी प्रभावित करेगी। जिस संस्था को विदेशी फंड मिला है, वह दूसरी संस्था को फंड ट्रांसफर नहीं कर सकती, भले उसके पास एफसीआरए पंजीकरण हो। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की जमीनी संस्था प्रभावित होगी। प्रशासनिक खर्च सीमा, आधार की अनिवार्यता और बैंक खातों को लेकर बदलाव है।
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