भिलाई, 02 अप्रैल (आरएनएस)। साहित्यिक संस्था अगासदिया द्वारा आमदीनगर (भिलाई ) में कल एक अप्रैल को छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोक- कलाकार स्वर्गीय दाऊ कोदूराम वर्मा की 102वीं जयंती पर उनकी स्मृति में विशेष समारोह का आयोजन किया गया । उन्हें छत्तीसगढ़ सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा लोक -कला, विशेष रूप से छत्तीसगढ़ी लोक नाट्य (नाचा ) के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 2007 में दाऊ मंदराजी सम्मान से भी विभूषित किया जा चुका है ।
अगासदिया के संस्थापक और अध्यक्ष डॉ. परदेशीराम वर्मा ने आज बताया कि छत्तीसगढ़ी लोक कलाओं के लिए आजीवन समर्पित रहे स्वर्गीय कोदूराम वर्मा शब्दभेदी बाण और कर्मा नृत्य के भी सिद्धहस्त कलाकार थे। वे तत्कालीन मध्यप्रदेश आदिवासी लोक कला परिषद के सदस्य भी रह चुके थे। स्वर्गीय वर्मा दुर्ग जिले में चलाए गए साक्षरता अभियान के भी प्रमुख कलाकार थे । लगभग तीन दशक पहले नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय समारोह में उन्होंने अपनी नृत्य मंडली के साथ तत्कालीन राष्ट्रपति के सामने छत्तीसगढ़ी कर्मा नृत्य का शानदार प्रदर्शन किया था और राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित हुए थे ।
स्वर्गीय कोदूराम वर्मा की याद में कल एक अप्रैल को आयोजित 102 वें जयंती समारोह के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण में साहित्य, कला और सांस्कृतिक लोकमंचों के माध्यम से बड़ा योगदान दिया है। अगासदिया द्वारा ऐसे पुरोधा सदैव याद किए जाते हैं। छत्तीसगढ़ी भाषा आठवीें अनुसूची में सम्मिलित हो यह हमारा सपना और संकल्प है। छत्तीसगढ़ी भाषा को सम्मान मिलना ही छत्तीसगढ़ का सम्मान है। मिश्रा ने कहा कि हमारे रचनाकार प्रतिभा सम्पन्न और यशस्वी हैं। हर विधा में विशेष लेखन हो रहा है। मंचीय पुराधाओं ने छत्तीसगढ़ी लोकमंच के विस्तृत आसमान को चमकदार बनाकर दुनियाँ भर का ध्यान आकृष्ट किया। हमें स्वाभिमान और सम्मान से जीना सिखाया।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए रायपुर के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुधीर शर्मा ने कहा कि ऐसे बहुआयामी आयोजन से जुड़कर हम सब समृद्ध होते हैं। कलाकारों और साहित्यकारों के बीच अगासदिया के संस्थापक डॉ. परदेशीराम वर्मा समान रूप से लोकप्रिय हैं। वे संस्कृति क्षेत्र में भी लेखन के माध्यम से महत्वपूर्ण काम करते हैं। विशेष अतिथि डॉ. सोनाली चक्रवर्ती ने अपने वक्तव्य में कहा कि स्वाभिमान और पहचान के लिए हम सब मिलकर काम करते हैं। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. रजनी नेलसन ने बताया कि एक अप्रेल को वरिष्ठ साहित्यकार संतोष झांझी, रंगोली कलाकार और शिक्षाविद् स्मिता वर्मा तथा रामचरित मानस गायिका ललिता साहू का जन्मदिन है। तीनों को अतिथियों ने बधाई दी। स्मिता वर्मा की चुनिंदा रंगोली कलाकृतियों का प्रदर्शन भी हुआ। अतिथियों ने विभिन्न पर्वों और व्यक्तित्वों पर केन्द्रित उनकी रंगोली कला को सराहा।
पत्रकार राजेन्द्र सोनबोईर, मोहम्मद जाकिर हुसैन और पुनीत कौशिक कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कलाकार महेश वर्मा ने कोदूराम वर्मा के मंचीय योगदान पर वक्तव्य देते हुए उन्हें कलाऋषि के रूप मे याद किया। अगासदिया के अध्यक्ष डॉ. परदेशीराम वर्मा ने कहा कि हमारे छत्तीसगढ़ के मंचीय पुरोधा और सूत्रधार दुलारसिंह साव मंदराजी, रामचंद्र देशमुख, महासिंह चंद्राकर सहित कोदूराम वर्मा सभी समृद्ध बड़े भूपति थे। इन्होंने लोककला एवं मंच को समृद्ध करने के लिए अपनी पैतृक सम्पत्ति को लगाया। परोपकारी ऐसे पुरोधा सामने आए इसलिए छत्तीसगढी़ लोकमंच का चमकता हुआ आसमान सबको आकृष्ट करता है।
आयोजन में महासमुंद के साहित्यकार राजेश्वर बन्धु खरे, रायपुर के साहित्यकार डॉ. सुखदेवे, भिलाई की पद्म कलाकार उषा बारले और समाजसेवी रामसेवक वर्मा ने अतिथियों को सम्मानित किया। कोदूराम वर्मा के पुत्र प्रेमलाल वर्मा सपरिवार आयोजन में उपस्थित थे। उषा बारले ने मंगल गान प्रस्तुत किया। संतोष झांझी ने अपना प्रसिद्ध गीत ‘ नमन है जि़न्दगी ‘सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
वरिष्ठ नागरिक संध आमदी नगर के अध्यक्ष अरूण अग्रवाल ने आभार प्रदर्शन किया। समारोह के अतिथियों और विशिष्ट प्रतिभागियों को स्मृतिचिन्ह एवं शाल भेंटकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विनायक अग्रवाल, संतोष अग्रवाल, अब्दुल कलाम, नीतिश कुमार, खड़ानंद वर्मा, प्रहलाद वर्मा, उषा वर्मा, मधु वर्मा और प्रेमलाल बबला सहित साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े अनेक प्रबुद्ध जन उपस्थित थे।
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