बिलासपुर, 03 अप्रैल (आरएनएस)। चकरभाठा थाना क्षेत्र में सामने आए हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी के मामले ने शहर में सनसनी फैला दी है। विदेशी निवेश और 103 करोड़ रुपये के डिमांड ड्राफ्ट क्लियरेंस का झांसा देकर एक व्यक्ति से 3 करोड़ 13 लाख 13 हजार रुपये ठग लिए गए। पुलिस ने इस मामले में हरियाणा निवासी एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।
पुलिस के अनुसार, ठगी की शुरुआत जनवरी-फरवरी 2024 में एक विदेशी नंबर से आए व्हाट्सएप मैसेज से हुई। खुद को ग्रेट ब्रिटेन निवासी डॉ. लोव्हीत बताने वाले आरोपी ने प्रार्थी से संपर्क किया और बाद में ग्रेस डेविड नाम की कथित महिला से जुड़वाया। इसके बाद भारत में बड़े निवेश का झांसा देकर विश्वास में लिया गया।
आरोपियों ने कैंसर अस्पताल, ब्लाइंड इंस्टीट्यूट, रियल एस्टेट और लॉ कॉलेज में करीब 500 करोड़ रुपये निवेश की योजना बताई और प्रार्थी को पार्टनर बनाने का लालच दिया। इसी दौरान 103 करोड़ रुपये के डिमांड ड्राफ्ट के क्लियरेंस के नाम पर लगातार पैसे की मांग की जाती रही।
शुरुआत में 11.50 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए गए, लेकिन बाद में अलग-अलग बहानों—होटल, एंबेसी, बैंक, आरबीआई और कस्टम प्रक्रिया—के नाम पर रकम बढ़ती गई। अंतत: प्रार्थी से कुल 3 करोड़ 13 लाख 13 हजार रुपये ठग लिए गए, लेकिन डिमांड ड्राफ्ट कभी क्लियर नहीं हुआ।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी फर्जी ईमेल आईडी बनाकर खुद को बैंक और सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताता था, जिससे प्रार्थी को भरोसे में लेकर लगातार ठगी करता रहा।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से थार और वेन्यू वाहन, मोबाइल फोन, टैबलेट और लैपटॉप जब्त किए हैं। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अब पूरे गिरोह की कडिय़ां जोड़ी जा रही हैं और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
मामले में बीएनएस की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने कहा कि यह मामला संगठित साइबर अपराध का उदाहरण है, जिसमें तकनीक और भरोसे का दुरुपयोग कर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी अनजान निवेश प्रस्ताव पर भरोसा न करने की अपील की है।
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