० बेदरे निवासी तामू सन्नू को मिला पीएम आवास
० सरकारी योजनाओं के सहारे बदली जिंदगी, वनाधिकार पत्र ने दिया मालिकाना हक
सुकमा, 04 अप्रैल (आरएनएस)। जिले से लगभग 96 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत सिलगेर के आश्रित गांव बेदरे निवासी तामू सन्नू की कहानी संघर्ष से सशक्तीकरण तक की ऐसी प्रेरक मिसाल है, जो हर जरूरतमंद परिवार को उम्मीद और हिम्मत देती है। सीमित संसाधन, कठिन परिस्थितियां और रोजमर्रा की चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने श्रम व संकल्प के दम पर परिवार के लिए बेहतर जीवन की राह बनाई।
तामू सन्नू वर्षों से मजदूरी और खेती-किसानी कर परिवार का पालन-पोषण करते रहे। कभी काम मिलता तो कभी नहीं, लेकिन वे हर परिस्थिति में मेहनत करते रहे। उनका जीवन लंबे समय तक एक कच्चे और कमजोर मकान में बीता, जहां बारिश के दिनों में छत और दीवारों से पानी टपकता था। परिवार को हर मौसम में डर और असुरक्षा के बीच जीना पड़ता था, पर आर्थिक कमजोरी के कारण पक्का घर बनाना उनके लिए संभव नहीं था।
ऐसे कठिन समय में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के द्वारा संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) उनके लिए उम्मीद की नई किरण बनकर आई। योजना के तहत उन्हें पक्का आवास स्वीकृत हुआ। लेकिन उन्होंने केवल सहायता राशि पर निर्भर न रहकर मनरेगा के अंतर्गत मजदूरी कर घर निर्माण में खुद भी योगदान दिया।
आज तामू सन्नू का परिवार अपने पक्के घर में सम्मान और सुकून के साथ जीवन जी रहा है। बारिश और तूफान का डर अब बीते दिनों की बात हो गई है। साथ ही परिवार को अन्य योजनाओं का भी लाभ मिला। उनकी बहू को महतारी वंदन योजना की राशि मिल रही है और उन्हें वनाधिकार पत्र के माध्यम से जमीन का मालिकाना हक भी प्राप्त हुआ है। तामू सन्नू की यह कहानी साबित करती है कि जब सरकारी योजनाओं का लाभ मेहनत और संकल्प से जुड़ता है, तो जीवन की तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है।
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