भोपाल,04 अपै्रल (आरएनएस)।मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने प्रदेश के शासकीय स्कूलों में कार्यरत 2 लाख से अधिक शिक्षकों की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है। पत्र के माध्यम से दिग्विजय सिंह ने आग्रह किया कि सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के संदर्भ में राज्य सरकार को रिव्यू पिटीशन या क्यूरेटिव पिटीशन दायर कर टीईटी अनिवार्यता को भूतलक्षी के बजाय भविष्यलक्षी प्रभाव से लागू कराने की मांग करनी चाहिए।
दिग्विजय सिंह ने लिखा कि वर्ष 2009 में केंद्र सरकार द्वारा शिक्षा का अधिकार कानून लागू किया गया था, जिसे मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल 2010 से लागू किया गया। इसके पालन में सर्वोच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र से संबंधित सिविल अपील क्रमांक 1385/2025, 1386/2025 एवं अन्य मामलों में निर्णय देते हुए सभी प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया है। हालांकि जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में 5 वर्ष शेष हैं, उन्हें छूट प्रदान की गई है। परीक्षा में असफल रहने पर सेवा समाप्ति या सेवानिवृत्ति की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
पूर्व सीएम ने कहा कि मध्य प्रदेश शासन के शिक्षा विभाग द्वारा मार्च 2026 में जारी आदेश के अनुसार सभी शिक्षकों को टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसकी परीक्षा जुलाई-अगस्त 2026 में संभावित है। इस आदेश के बाद से स्कूल शिक्षा विभाग एवं आदिवासी विकास विभाग के 2 लाख से अधिक शिक्षकों में गहरी चिंता व्याप्त है। 25-30 वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए सेवा के अंतिम चरण में इस प्रकार की परीक्षा अनिवार्यता को अनुचित बताया गया है।
टीईटी परीक्षा फेल में की स्थिति में हजारों शिक्षकों की आजीविका संकट में पड़ सकती है तथा उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो सकता है। साथ ही 40,-50 वर्ष आयु वर्ग के शिक्षकों के लिए इस प्रकार की परीक्षा की अनिवार्यता को भी न्यायसंगत नहीं माना गया है। दिग्विजय सिंह ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि प्रभावित शिक्षक संगठनों के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिकाएं दायर करने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा।
दिग्विजय सिंह ने सुझाव दिया है कि राज्य सरकार स्वयं शिक्षकों का पक्ष न्यायालय में रखे, जिससे शिक्षकों को आर्थिक राहत मिलेगी और सरकार के प्रति विश्वास भी सुदृढ़ होगा।

