लखनऊ 10 अप्रैल (आरएनएस ) उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) द्वारा आयोजित विकसित कृषि विकसित भारत/2047 के लिये कृषि में परिवर्तन विषयक तीन दिवसीय छठवीं उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस का शुक्रवार को राष्ट्रीय गन्ना संस्थान में विधिवत समापन हो गया। समापन सत्र के मुख्य अतिथि प्रदेश के उद्यान एवं कृषि विपणन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह रहे, जिन्होंने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 14 एकेडमी एवार्डी, 9 फैलो एवार्डी और 7 ऑनरेरी फैलो को सम्मानित किया।इस अवसर पर भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान (झांसी), रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (झांसी) तथा असारा बायोटेक प्रोड्यूसर्स कंपनी लिमिटेड (बाराबंकी) को उत्कृष्ट कृषि विज्ञान संस्थान एवं विश्वविद्यालय पुरस्कार से नवाजा गया। कार्यक्रम में देशभर से आए वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने कृषि क्षेत्र के विकास और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर विस्तृत चर्चा की।कांग्रेस के अंतिम दिन दो महत्वपूर्ण तकनीकी सत्रों के साथ-साथ दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों के दौरान आजीविका सुरक्षा, डेयरी, पशुपालन, पोल्ट्री, मत्स्य पालन और डिजिटल कृषि जैसे समसामयिक विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। प्रथम तकनीकी सत्र में डॉ. पी. के. पाण्डेय, डॉ. चेतना गंगवार, डॉ. उमेश सिंह, डॉ. रचना वर्मा और डॉ. मनीष कुमार चतली जैसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। वहीं द्वितीय तकनीकी सत्र में डॉ. जे.सी. राना, डॉ. राघवेन्द्र सिंह, डॉ. सुधांशु सिंह, पद्मश्री भारत भूषण त्यागी और भानु प्रताप सिंह ने कृषि की भावी चुनौतियों और उनके संभावित समाधानों पर विस्तार से प्रकाश डाला।विशेषज्ञों ने कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों को प्रमुखता से रेखांकित किया। डॉ. चेतना गंगवार ने पशुधन क्षेत्र में कम उत्पादकता, चारे की कमी और कमजोर बाजार संपर्क को किसानों के शोषण का प्रमुख कारण बताया। वहीं डॉ. रचना वर्मा ने पोल्ट्री क्षेत्र में एंटीबायोटिक प्रतिरोध के बढ़ते खतरों के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता पर बल दिया। गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने मिट्टी के स्वास्थ्य और जैव विविधता के संरक्षण के लिए गौ-आधारित प्राकृतिक खेती को प्रभावी विकल्प बताया। भानु प्रताप सिंह ने कहा कि मिट्टी में घटता मृदा जैविक कार्बन फसल उत्पादन के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है, जिससे निपटने के लिए किसानों को जैविक खाद और फसल चक्र जैसी टिकाऊ पद्धतियों को अपनाना आवश्यक है।सम्मानित होने वाले प्रमुख वैज्ञानिकों में डॉ. संजय कुमार सिंह, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. यश पाल सिंह, डॉ. विकास चंद्र, डॉ. संगीता श्रीवास्तव, डॉ. पवन कुमार सिंह और डॉ. चेतना गंगवार शामिल रहे। ऑनरेरी फैलो के रूप में डॉ. त्रिवेणी दत्त (कुलपति, मेरठ), डॉ. अभिजित मित्र (कुलपति, मथुरा) और डॉ. यू.पी. सिंह (निदेशक, बीएचयू) को उनके विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।कार्यक्रम में उपकार के अध्यक्ष कैप्टन (सेवानिवृत्त) विकास गुप्ता और प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. विनोद कुमार तिवारी सहित देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और कृषि विशेषज्ञों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। समापन अवसर पर वक्ताओं ने कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के समावेश, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने के लिए अनुसंधान आधारित कार्यों को और गति देने पर जोर दिया।
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