भोपाल 10 अप्रैल (आरएनएस)। हबीबगंज थाने का शुक्रवार शाम को वकीलों ने घेराव कर दिया है। एक एडवोकेट पर एफआईआर दर्ज करने के विरोध में यह घेराव किया गया है। दरअसल गुरुवार की रात को एडवोकेट सिकंदर सिंह राजपूत हबीबगंज के घर की रसोई नाम के होटल में खाना खाने पहुंचे थे। जहां उन्हें सब्जी परोसी गई, जो बासी लग रही थी।
इसकी शिकायत एडवोकेट की ओर से होटल मैनेजमेंट से की गई। उन्होंने सब्जी खराब होने की बात मानने से इनकार किया इस बात पर विवाद शुरू हुआ। आरोप है कि इसी बात पर होटल स्टॉफ ने वकील के साथ मारपीट की।
जब वह शिकायत करने थाने पहुंचे तो पुलिस ने आवेदन लेकर थाने से चलता कर दिया। शुक्रवार की दोपहर को पता लगा कि उल्टा वकील के खिलाफ ही पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर दी है। जबकि वकील का आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ थाने में बदसलूकी की थी। जिसका विरोध करने पर एक पक्षीय कार्रवाई की गई।
सिकंदर सिंह राजपूत ने बताया कि 11 नंबर पर भोजन लेने के लिए घर की रसोई नामक भोजनालय गए थे। वहां जब खाना लिया गया तो उसे अधिवक्ता मित्र ने सब्जी चेक की तो उसमें से बदबू आ रही थी। खराब सब्जी की शिकायत संचालक की ओर कहा कि मुझे यह सब्जी खाना नहीं चाहिए आप इसको वापस करके मेरा पैसे वापस दे दो।
तब होटल संचालक ने खाना वापस करने से मना करते हुए कहा हम खाना वापस नहीं करेंगे। तुम्हें जो करना है कर लो…तब मैने बताया कि मैं अधिवक्ता भी हूं। इस बात से बहुत चिढ़ गया और अभद्रता शुरू कर दी। वकालत के पेशे को लेकर भला बुरा कहा जिसकी वीडियो भी है,ऐसा कहते हुए वह टोटल के संचालक ने फोन लगाकर पास की उसकी अन्य होटल से गुंडे कर्मचारी बुलवाकर मेरे साथ मारपीट की।
होटल संचालक ने सबसे पहले मेरे गले में झपट्टा मारते हुए मेरी ढाई तोला सोने की चेन छीनी। थाने पहुंचा तो वहां भी बदसलूकी की गई। जिसका वीडियो मैंने बनाया है। इससे गुस्साए पुलिसकर्मी ने अपराधियों की तरह सलूक किया। मेरे हर एंगल से फोटो खींचे।
एडवोकेट सौरभ स्थापक ने बताया कि लगातार वकीलों के खिलाफ एक पक्षीय कार्रवाई के मामले सामने आ रहे हैं। एडवोकेट सिकंदर सिंह राजपूत के साथ भी थाने में अभद्रता की गई और विरोध करने पर एक पक्षीय कार्रवाई की गई है।
जिसकी जांच कराने के बाद एफआईआर निरस्त करने की मांग को लेकर थाने का घेराव किया गया है। यदि मांग नहीं मानी जाती तो उग्र प्रदर्शन किए जाएंगे। वकीलों के हित के लिए प्रदेश व्यापी आंदोलन किए जाएंगे।

