बस्ती 13 अप्रैल (आरएनएस)। सोमवार को वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति के महामंत्री एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के बंशज वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम प्रकाश शर्मा के संयोजन में कलेक्टेऊट परिसर में 107 वर्ष पूर्व हुये जलियावाला बाग के अमर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किया गया।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के बंशज श्याम प्रकाश शर्मा ने कहा कि 13 अप्रैल 1919 को बर्बरता की ऐसी पराकाष्ठा पार की गई कि आज भी दीवारों पर उसके निशान नजर आते हैं। आज भी वो निशान देखकर हर कोई सहम जाता है। यह कहानी है जलियांवाला बाग नरसंहार की, जब अंग्रेजों ने भीड़ पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं। ये बात और है कि ब्रिटेन ने आज तक भारत में किए अपने इस घृणास्पद कृत्य के लिए माफी नहीं मांगी है। अंग्रेज आजादी के आंदोलन और क्रांतिकारी गतिविधियों को दबाने के नाम पर भारतीयों के मौलिक अधिकारों को खत्म करना चाहते थे। ऐसे अमर बलिदानियों को सदैव याद किया जायेगा।बीएन शुक्ल की अध्यक्षता में हुये कार्यक्रम में बी.के. मिश्र, आचार्य छोटेलाल वर्मा, मयंक श्रीवास्तव, अजमत अली सिद्दीकी ने कहा कि इस घटना को लगभग 107 साल हो गए हैं। लंबे वक्त से अलग-अलग मंचों से मांग उठती रही है कि ब्रिटिश सरकार जलियांवाला बाग नरसंहार के लिए लिखित में माफी मांगे, हालांकि ये अब तक नहीं हो पाया है। 13 अप्रैल 1919 को पंजाब में बैसाखी का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा था। पूरा पंजाब झूम रहा था। इस दिन अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के पास स्थित जलियांवाला बाग में सभा चल रही थी। करीब 15 से 20 हजार लोग उस बाग में जमा हो गए। जनरल डायर के आदेश पर निर्दोष लोगों पर गोलियां चलवा दी गई। इसे याद करके मन सिहर जाता है। ऐसे बलिदानियों को नमन करने वालों में मुख्य रूप से अमरपाल एडवोकेट, मेहीलाल, पेशकार मिश्र, प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, दीनानाथ यादव, ओम प्रकाश धर द्विवेदी, कृष्णचन्द्र पाण्डेय, नेबूलाल आदि शामिल रहे।
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