जौनपुर 15 अप्रैल (आरएनएस )। पोषाहार वितरण में ई-केवाईसी और चेहरा प्रमाणीकरण (एफआरसी) में लापरवाही बरतने पर सात बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) और सुपरवाइजरों को नोटिस जारी किया गया है। उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है और सुधार न होने पर मानदेय रोकने के साथ विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। मुख्य विकास अधिकारी ध्रुव खाडिय़ा ने समीक्षा बैठक के दौरान लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। कार्रवाई की जद में धर्मापुर, मछलीशहर, मडिय़ाहूं, करंजाकला, मुंगराबादशाहपुर और रामपुर ब्लॉक के सीडीपीओ शामिल हैं। संबंधित सुपरवाइजरों पर भी कार्रवाई की गई है। जिला कार्यक्रम अधिकारी नरेंद्र सिंह ने बताया कि एफआरसी के माध्यम से पोषाहार वितरण में जिले की स्थिति प्रदेश में नौवें स्थान पर है, जो पहले से बेहतर प्रगति दर्शाती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में लापरवाही बरतने वाले सीडीपीओ और सुपरवाइजरों को नोटिस जारी किए गए हैं और सुधार न होने पर अन्य विभागीय कार्रवाई की जाएगी। जिले में कुल 2 लाख 27 हजार 335 लाभार्थियों में से केवल 1 लाख 95 हजार 885 को ही एफआरसी के माध्यम से पोषाहार वितरित किया जा सका है। बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से वितरण व्यवस्था में यह बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के तहत, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अब मनमाने तरीके से नहीं, बल्कि चेहरा पहचान कर बच्चों को पुष्टाहार वितरित करेंगी। बाल विकास पुष्टाहार विभाग नौनिहालों को सुपोषित करने के लिए चने की दाल, गेहूं का दलिया, चावल और खाद्य तेल उपलब्ध करा रहा है। वितरण में अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए यह नई प्रणाली शुरू की गई है, हालांकि कुछ ब्लॉकों से अभी भी मनमानी की शिकायतें मिल रही हैं।
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