—- नारी शक्ति वंदन अधिनियम।
कुशीनगर, 16 अप्रैल (आरएनएस)। भारतीय लोकतंत्र एक बड़े बदलाव के दौर में प्रवेश कर चुका है। वर्ष 2026 को इतिहास उस समय के रूप में याद करेगा, जब वर्षों से उपेक्षित ‘आधी आबादीÓ को सियासत में उसका असली हक मिला। नारी शक्ति वंदन अधिनियम अब केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि देश की राजनीतिक सोच में क्रांतिकारी बदलाव का प्रतीक बन चुका है।
उक्त बातें उदित नारायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. ममता मणि त्रिपाठी ने अपने कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में कही। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं के संघर्ष, धैर्य और संकल्प की जीत है। उन्होंने कहा कि 27 वर्षों तक राजनीतिक गलियारों में उलझा यह मुद्दा आखिरकार मजबूत नेतृत्व और स्पष्ट नीयत के चलते साकार हुआ। डॉ. त्रिपाठी ने दो टूक कहा कि अब महिलाएं सिर्फ मतदान केंद्र तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि सत्ता के केंद्र में बैठकर नीतियां तय करेंगी। यह बदलाव भारतीय लोकतंत्र को नई ऊर्जा देगा और विकास को ज्यादा संतुलित और समावेशी बनाएगा।उन्होंने कहा कि महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी से शासन अधिक संवेदनशील होगा। जिससे समाज के हर वर्ग की आवाज सुनी जाएगी। खासकर महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर अब गंभीरता और प्राथमिकता दोनों बढ़ेंगी।
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