—- हाईकोर्ट की अवमानना का बड़ा मामला उजागर।
कुशीनगर, 16 अप्रैल (आरएनएस)। जनपद के पडरौना तहसील क्षेत्र के ग्राम सभा खड्?डा खुर्द स्थित गाटा संख्या 189 की सरकारी भूमि पर वर्षों से चला आ रहा अवैध कब्जा अब प्रशासनिक निष्क्रियता के वजह से न्यायिक आदेशों की अनदेखी का बड़ा उदाहरण बन कर रह गया है। हैरानी की बात यह है कि उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश, अवमानना याचिका में सख्त टिप्पणी और अपील खारिज होने के बाद भी जिला प्रशासन द्वारा अब तक अवैध कब्जे पर बुलडोजर नही चलाया गया। नतीजतन सरकारी भूमि पर अतिक्रमणकारियों का अवैध कब्जा कायम है।
आरोप है कि नाथू शर्मा, गुड्डी देवी, शैलेष शर्मा, रामू शर्मा, संदीप शर्मा व कृष्णा शर्मा ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है। पीडि़त पक्ष देवेन्द्र प्रताप श्रीवास्तव ने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। थक-हारकर देवेन्द्र प्रताप श्रीवास्तव को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी, जहां रिट संख्या 20646 पर 03 दिसंबर 2020 को आदेश पारित हुआ। इसके बावजूद जब जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो अवमानना याचिका संख्या 3046 दाखिल की गई, जिस पर 11 अगस्त 2021 को न्यायालय ने सख्ती दिखाई। इसके बाद धारा 67 के तहत कार्रवाई शुरू हुई, लेकिन आरोपियों ने प्रक्रिया को लंबित रखने के लिए अपीलों का सहारा लिया। हालांकि उनकी सभी अपीलें खारिज हो चुकी हैं। बड़ा सवाल यह है कि जब न्यायालय का आदेश, अवमानना का निर्देश और अपील खारिज होने जैसे सभी कानूनी पड़ाव पार हो चुके हैं, तो आखिरकार जिला प्रशासन किस बात का इंतजार कर रहा है? अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने से परहेज क्यो? सबब यह है कि मामला सिर्फ सरकारी भूमि पर कब्जे तक सीमित नही रह गया है, बल्कि न्यायिक आदेशों की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है। ऐसे मे समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करेगा। पीडि़त पक्ष ने जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप कर कब्जा हटवाने और न्यायालय के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने की मांग की है। अब देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन द्वारा अवैध कब्जा मुक्त कराकर न्यायालय के आदेश का पालन किया जाता है या फिर हाईकोर्ट का आदेश फाइलों में ही दम तोड़ता है ?।
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