दुर्ग 17 (आरएनएस) दुर्ग जिले के एक भीड़भाड़ वाले मार्केट क्षेत्र में 29 मार्च 2026 की रात करीब 11 बजे जूते-चप्पल की दुकान में अचानक भड़क उठी भीषण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया, आसपास दुकानें सटी हुई थीं, ज्वलनशील सामान मौजूद था और हालात ऐसे थे कि चंद मिनटों में पूरा बाजार आग की चपेट में आ सकता था, लेकिन जैसे ही सूचना मिली, फायर ब्रिगेड और होमगार्ड की टीम बिना समय गंवाए मौके पर पहुंची, हालात की गंभीरता समझते ही अतिरिक्त फायर टेंडर और संसाधन बुलाए गए और फिर शुरू हुआ आग से सीधा मुकाबला, धुएं और लपटों के बीच जवान अंदर तक घुसे, जोखिम उठाया, पानी की बौछारों से आग को घेरा और रणनीतिक तरीके से उसे फैलने से रोक दिया, इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान जिला सेनानी एवं जिला अग्निशमन अधिकारी श्री नागेंद्र कुमार सिंह ने संभाली, मौके पर मौजूद रहकर टीमों का विभाजन किया, हर मूवमेंट पर नजर रखी और सटीक दिशा-निर्देश देकर हालात को काबू में किया, उनके साथ प्रधान आरक्षक संतोष पाण्डेय, सहायक फायर प्रभारी एफ. प्रवीण बारा, चालक धनसुख यादव सहित फायरमैन संतोष मडकिया, उमाशंकर, कुलदीप सिंह, पप्पा भारद्वाज, घनश्याम यादव, राजूलाल, टीकेश्वर, कमलेश, नितिन रामटेके, रमेश कुमार, हरीश कुमार और कन्हैया यादव ने भी जान जोखिम में डालकर आग बुझाने में अहम भूमिका निभाई, इस तेज और समन्वित कार्रवाई के चलते ना सिर्फ आग पर समय रहते काबू पाया गया बल्कि आसपास की दुकानों, प्रतिष्ठानों और संभावित जनहानि को भी टाल दिया गया, इस साहसिक और सराहनीय कार्य को देखते हुए दुर्ग पुलिस अधीक्षक ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया, यह सम्मान सिर्फ एक कागज नहीं बल्कि उस जज्बे की पहचान है जिसने एक बड़ी तबाही को होने से रोक दिया, दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन करें, बिजली और ज्वलनशील वस्तुओं के इस्तेमाल में सतर्क रहें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सूचना दें, क्योंकि हादसे अचानक होते हैं लेकिन सतर्कता और साहस ही उन्हें आपदा बनने से रोकते हैं।
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