बलरामपुर-रामानुजगंज , 22 अप्रैल (आरएनएस)। जिले के बलरामपुर नगर पालिका परिषद में मोबाइल मेडिकल यूनिट (रूरू) के लिए दवा खरीद में सामने आई भारी अनियमितताओं का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है। संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास, सरगुजा संभाग की जांच में लाखों रुपये की वित्तीय गड़बडिय़ों और प्रशासनिक लापरवाही का खुलासा होने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से सवाल खड़े हो रहे हैं।
जांच प्रतिवेदन के अनुसार, पोर्टल डेटा में लगभग ?3.20 लाख की दवाइयाँ एक्सपायर पाई गईं, जबकि नगर पालिका द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों में यह राशि मात्र ?84 हजार के आसपास बताई गई। इस बड़े अंतर ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है। इसके अलावा कई दवाइयाँ अधिकतम खुदरा मूल्य (रूक्रक्क) से कहीं अधिक दर पर खरीदी गईं, जिससे सरकारी खजाने को हजारों रुपये का अतिरिक्त नुकसान हुआ।
जांच के दौरान रिकॉर्ड संधारण में भी गंभीर लापरवाही सामने आई। दवा खरीद से जुड़े आवश्यक दस्तावेज—जैसे मांग पत्र, स्टॉक रजिस्टर, आपूर्ति विवरण और नोटशीट—उपलब्ध नहीं पाए गए। कई बिलों में तिथि, दर और आदेश क्रमांक में भी गड़बड़ी मिली, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह रही कि कई दवाइयाँ ऐसी खरीदी गईं जिनकी एक्सपायरी तिथि बेहद नजदीक थी, वहीं कुछ मामलों में एक्सपायर दवाओं की खरीद भी सामने आई। साथ ही शासन के निर्देशों के विपरीत गैर-स्वीकृत ब्रांड की दवाइयाँ भी खरीदी गईं।
इस पूरे मामले में प्रणव राय, सुमित गुप्ता, वसुंधरा भगत, आशीष विश्वास और हर्ष राजपूत की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इन पर कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही और शासन को वित्तीय क्षति पहुंचाने के आरोप हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य स्तर पर स्ष्ठ्र टीम द्वारा अलग से जांच जारी है और विस्तृत रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जा चुकी है।
इसी बीच वार्ड क्रमांक 12 के पार्षद अमित गुप्ता मंटू ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि “करीब 7 महीने पहले ही कार्रवाई के आदेश दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे भ्रष्टाचार में शामिल लोगों का मनोबल बढ़ रहा है।”
निष्कषर्:
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े इस संवेदनशील मामले में अनियमितताओं का उजागर होना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कब और कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
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