रायपुर, 23 अप्रैल (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ सरकार ने शासकीय कर्मचारियों की राजनीतिक गतिविधियों पर रोक संबंधी अपने आदेश को जारी करने के महज़ एक दिन के भीतर स्थगित कर दिया है। इस त्वरित फैसले ने प्रशासनिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा सभी विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को जारी निर्देश में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया था कि कोई भी शासकीय कर्मचारी किसी राजनीतिक दल या संगठन का सक्रिय सदस्य नहीं होगा और न ही किसी राजनीतिक गतिविधि में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भाग लेगा।
इसके अलावा आदेश में यह भी कहा गया था कि शासकीय कर्मचारी बिना सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के किसी भी शासकीय या अशासकीय संस्था, समिति, संगठन या निकाय में कोई पद धारण नहीं करेगा। साथ ही ऐसे किसी दायित्व को स्वीकार करने से भी रोका गया था, जिससे उसकी प्रशासनिक निष्पक्षता प्रभावित हो सकती हो।
निर्देशों के उल्लंघन की स्थिति में कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।
हालांकि, आदेश जारी होने के अगले ही दिन सामान्य प्रशासन विभाग ने एक नया पत्र जारी कर पूर्व निर्देशों को आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया।
सरकार के इस त्वरित यू-टर्न को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसा क्या कारण रहा कि सरकार को महज़ 24 घंटे में ही अपने ही आदेश को वापस लेना पड़ा।
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