वाशिंगटन, 26 अपै्रल। पश्चिम एशिया में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हुए हमले में करोड़ों डॉलर का नुकसान हुआ है। कई अमेरिकी अधिकारियों और स्थिति से परिचित लोगों ने ये जानकारी दी है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि शुरू में लगाए गए अनुमानों से कहीं ज्यादा नुकसान पहुंचा है।
अधिकारियों ने बताया कि तबाही का दायरा अब तक सार्वजनिक रूप से साझा की गई जानकारी से कहीं ज्यादा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन हमलों ने कम से कम 7 देशों में महत्वपूर्ण सैन्य स्थलों को निशाना बनाया है। इनमें भंडारण गोदाम, कमांड सेंटर, विमान हैंगर और उपग्रह संचार की प्रणालियां शामिल हैं। इन हमलों से रनवे, रडार प्रणालियों और कुछ विमानों को भी नुकसान पहुंचा है, जो सभी सैन्य आवाजाही और निगरानी के लिए अहम हैं। एक मामले में तो ईरान का एक पुरानी एफ-5 लड़ाकू विमान अमेरिकी हवाई रक्षा प्रणालियों को तोड़कर हमला करने में सफल रहा।
ईरानी हमलों में वास्तविक नुकसान को लेकर अमेरिकी रक्षा विभाग ने जानकारी साझा नहीं की है। पश्चिम एशिया में सैन्य मामलों की जिम्मेदार अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने भी नुकसान को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है। पारदर्शिता को लेकर रिपब्लिकन सांसद भी नाराजगी जता रहे हैं। एक सांसद ने कहा, किसी को कुछ नहीं पता। ऐसा इसलिए नहीं है कि हमने जानकारी नहीं मांगी। हम हफ्तों से जानकारी मांग रहे हैं, लेकिन कोई ठोस विवरण नहीं मिल रहा है।
अमेरिका के लिए युद्ध का हर दिन बेहद महंगा साबित हो रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका हर दिन लगभग 8,000 करोड़ रुपये से लेकर 1.88 लाख रुपये तक युद्ध में खर्च कर रहा है। जंग के शुरुआती 6 दिनों में ही 1 लाख करोड़ रुपये से 1.19 लाख करोड़ रुपये के बीच खर्च हो चुके थे। यही वजह है कि पेंटागन ने अमेरिकी कांग्रेस से 1.88 लाख करोड़ रुपये के बजट की मांग की है।
पेंटागन के एक अधिकारी ने कहा, हम ऑपरेशनल सुरक्षा कारणों से लड़ाई में हुए नुकसान के आकलन पर चर्चा नहीं करते हैं। हमारी सेना पूरी तरह से ऑपरेशनल है और हम उसी तत्परता और युद्ध-क्षमता के साथ अपने मिशन को जारी रखे हुए हैं।
सूत्रों ने आगे बताया कि व्हाइट हाउस ने हमले के बाद निजी सैटेलाइट कंपनियों से अमेरिकी ठिकानों की तस्वीरें प्रकाशित न करने को कहा था।
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