अजय दीक्षित
परिसीमन का प्रावधान भारतीय संविधान में इस लिए किया गया था कि देश सभी नागरिकों को उनका अपना प्रतिनिधित्व मिल सके। किसी एक सीट पर किसी एक जाति
का बर्चस्व न रहे इसलिए सीट की सीमा क्षेत्र की अहमियत से बदलती रहे । और समय समय पर आवादी के अनुपात में लोगों को प्रतिनिधित्व मिलता रहे। भारतीय संविधान यह भी कहता है कि इसको तय करने के लिए जनगणना को आधार बनाया जाए। पहली जनगणना 1951 में हुई और तभी जन प्रतिनिधित्व अधिनियम स्थापित हुआ उसके आधार पर पहले लोकसभा चुनाव 1952 में संपन्न हुआ। तत्कालीन समय में लोकसभा सीट संख्या 489 थी । उसके उपरांत 1971 की जनगणना के आधार लोकसभा सीट संख्या 520 करदी गई। जिनमें से 517के चुनाव होते हैं और तीन सदस्य मनोनीत होते हैं।1971 में देश की जनसंख्या 64 करोड़ थी लेकिन 2011 की जनगणना में 130 करोड़ हो गई। लेकिन लोकसभा की सीट संख्या 545 है।चुकी परिसीमन प्रस्तावित है तो सदन की संख्या भी बढऩी चाहिए़। इसलिए मोदी सरकार 850 संख्या करने के लिए 131संविधान संशोधन बिल सदन में लेकर आई लेकिन दो तिहाई बहुमत न जुटा सकी और बिल गिर गया।
लोकसभा जो परिसीमन बिल आया उसमें कहा गया था लोकसभा की संख्या 850 होगी और इसमें से 35 सदस्य राज्यों से और 35 सदस्य केंद्रीय राज्यों जैसे दिल्ली, जम्मू कश्मीर,पांडिचेरी, दमन,द्वीप, नगर हवेली, अंडमान निकोबार, चंडीगढ़,से आएगी। उत्तर प्रदेश में 120 सर्वाधिक संख्या होगी प्रत्येक राज्य में पचास फीसदी सीट बढ़ेगी।इसी प्रकार राज्य विधानसभा क्षेत्र में भी पचास फीसदी सीट बढ़ेगी।इन सीटों में से 33 प प्रतिशत क्षेत्र महिलाओं को आरक्षित होंगी। महिलाओं को आरक्षित सीट में से अनुसूचित जाति,जनजाति का आरक्षण होगा। तथा लोकसभा क्षेत्र नए परिसीमित होगे।। अधिकतम जनसंख्या एक लोकसभा क्षेत्र बीस लाख होगी और न्यूनतम दो लाख ।
क्योंकि अंडमान निकोबार और नई दिल्ली सीट बहुत छोटी है। लेकिन कांग्रेस, सपा, डीएमके, तुड़मूल कांग्रेस किसी कीमत पर सम्बिधान संशोधन बिल पारित नहीं होने दे सकते थे क्योंकि मोदी सरकार के पास बहुमत है पर दो तिहाई नहीं है जो सम्बोधन संशोधन के लिए आवश्यक है।
देश में 2024 में लोकसभा चुनाव हुए थे अभी चुनावों को दो वर्ष भी नहीं हुए हैं।अगला चुनाव 2029 में है ।तब तक कुछ नहीं होना ।सपा के नेता अखिलेश यादव ने सदन में कह दिया कि महिला को प्रधानमंत्री बना दे भाजपा तो भी हम ये बिल पारित नहीं करेंगे।
दरअसल विपक्ष सरकार का रायता फैलाना चाहता है वह कह रहा है कि जब जनगणना जारी है तो उसकी फाइंडिंग आ जाने दो उसमें ओबीसी जातियां का भी समावेश होगा तो विपक्ष सरकार से लोकसभा, विधानसभा सीटों में से ओबीसी जातियां के आरक्षण की मांग रखेगा । बताया जाता है 53 फीसदी ओबीसी जातियां है।यानि पूरी लोकसभा आरक्षित हो सकती है क्योंकि 33 फीसदी महिलाएं,53 फीसदी ओबीसी, और 30 फीसदी अनुसूचित जाति, जनजाति, अंत में सर्वोच्च न्यायालय फैसला करेगा कि 50 फीसदी से अधिक सीट आरक्षित नहीं होंगी फिर विपक्ष आंदोलित हो सकता है। विपक्ष अब आर पार के मूड में है क्योंकि 15 वर्ष लगातार कोई प्रधानमंत्री नहीं रहा है। पंडित जवाहरलाल नेहरू भी 1947 से 1952 तक बिना चुनाव के प्रधानमंत्री रहे थे और 1952 से 57 ,,57 से 62 और 62 से 64 तक 17 वर्ष प्रधानमंत्री रहे । लेकिन मोदी सरकार 2014 से 29 तक 15 लगातार प्रधानमंत्री रहेंगे और यही स्थिति रही तो 2034 तक भी रह सकते हैं। विपक्ष को सोचना यह है कि अगर भारतीय जनता पार्टी सभी राज्यों सत्ता में बैठी जिसमें अभी बंगाल, तमिलनाडु शेष है। अगर बंगाल में जीत गई तो विपक्ष को राजनीतिक पराभव देखना पड़ेगा।
बताया जाता है कि अब कांग्रेस, सपा,आप,बीजेडी, सीपीएम सीपीई, आरएसपी, आदि सभी पार्टियों को संसाधनों से भी झूझना पड़ रहा दूसरी भारतीय जनता पार्टी जैसी पार्टी है जिसके पास संसाधनों का कोई टोटा नहीं है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 42 संगठन तो पंजीकृत हैं।
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