0 भ्रम, डेटा चोरी, टैक्स के डर से स्व-गणना से परहेज
0 सरकारी पोर्टल पर देने होंगे 33 सवालों के जवाब
रायपुर, 28 अप्रैल (आरएनएस)।
छत्तीसगढ़ में स्व-गणना की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और इसके लिए केवल तीन दिन शेष रह गए हैं। …और छत्तीसगढ़ में स्व-गणना की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और इसके लिए केवल तीन दिन शेष रह गए हैं। आधिकारिक पोर्टल पर जाकर 15 मिनट के भीतर प्रक्रिया को पूरी की जा सकती है। 30 अप्रैल के बाद घर-घर जनगणना शुरू हो जाएगी। अब तक करीब 80 हजार परिवारों ने ही ऑनलाइन जनगणना में भाग लिया है, जबकि प्रदेश में 90 लाख परिवार होने का अनुमान है।
डर से स्व-गणना से परहेज कर रहे लोग
प्रदेश के करीब 2.5 करोड़ ऑनलाइन उपभोक्ताओं की तुलना में यह भागीदारी काफी कम है। लोग भ्रम, डेटा चोरी, टैक्स, पुलिस या अन्य जांच में जानकारी का उपयोग होने के डर से स्व-गणना से परहेज कर रहे हैं। हालांकि अधिकारियों की तरफ से पहले ही यह स्पष्ट किया जा चुका है कि जानकारी गोपनीय रखी जाती है। टैक्स, पुलिस या जांच में जानकारी का उपयोग नहीं किया जा सकता है। इन आंकड़ों का उपयोग केवल प्रदेश व देश के विकास की योजनाएं बनाने के लिए किया जाता है।
लोगों को 33 सवालों के जवाब देने हैं
स्व-गणना में परिवार की संरचना, उपलब्ध सुविधाएं और परिसंपत्तियों से जुड़े 33 सवालों के जवाब देने हैं। अधिकारियों का कहना है कि पहली बार जनगणना को डिजिटली कराया जा रहा है, जिसमें स्व-गणना भी एक विकल्प है। स्व-गणना ऐच्छिक हैं। इसके बाद कर्मचारी घर-घर जाएंगे।
किराए के मकान में निवासरत हैं तो भी विकल्प उपलब्ध
स्व-गणना प्रक्रिया पूरी करने वाले लोगों को कर्मचारियों के घर पहुंचने पर सिर्फ ऑनलाइन जानकारी भरने के बाद जनरेट हुई एसईआइडी दिखाना होगा। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी राज्य के हों, लेकिन वर्तमान में जहां निवासरत हैं, उसी के अनुसार जानकारी भरनी है। स्वयं या किराए के मकान में निवासरत हैं तो स्व-गणना में उसके भी विकल्प उपलब्ध हैं।
स्व-गणना के फायदे
– समय और संसाधनों की बचत होती है। काम तेजी से पूरा होता है।
– कर्मचारियों के घर-घर पहुंचने पर संशोधन का अवसर मिलता है।
– तीसरे व्यक्ति पर निर्भरता कम होने से गलतियों की संभावना कम होती है।
– सरकारी कर्मी के न आने का इंतजार और न कहीं जाने की जरूरत।
– दर्ज की गई जानकारी सीधे सिस्टम में, हेराफेरी या बदलाव की संभावना नहीं।
जनगणना से संबंधित किसी प्रकार की जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1855 स्थापित किया गया है, जो 16 अप्रैल से शुरू है।
1 मई से घर-धर जाकर मकान सूचीकरण
प्रदेश जनगणना के नोडल अधिकारी मनोज कुमार पिंगुआ ने बताया कि 16 अप्रैल से डिजिटल मोड पर स्व-गणना और एक मई से कर्मचारी (प्रगणक) घर-घर जाकर मकान सूचीकरण का काम करेंगे। स्व-गणना ऐच्छिक है लेकिन लोगों को बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। इससे समय की बचत होती है और तेजी से काम होता है। स्व-गणना पूरी तरह से सुरक्षित है। जानकारी का कहीं पर उपयोग नहीं होता है।
एसएस
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