प्योंगयांग, 28 अपै्रल। कोरोना वायरस महामारी में के दौरान जहां पूरी दुनिया इस वायरस के प्रकोप से जूझ रही थी, वहीं दूसरी ओर उत्तर कोरिया में लोगों को फांसी की सजा दिए जाने में बढ़ोतरी हुई थी। उस दौरान देश में कुल 153 लोगों को फांसी की सजा सुनाई या दी गई थी। सियोल स्थित ट्रांजिशनल जस्टिस वर्किंग ग्रुप (टीजेडडब्ल्यूजी) गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) की रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
टीजेडडब्ल्यूजी की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2020 से लेकर दिसंबर 2024 तक उत्तर कोरिया में कम से कम 153 लोगों को फांसी दी गई या मौत की सजा सुनाई गई थी। यह महामारी से पहले के 5 सालों में 44 लोगों को दी गई फांसी की सजा की तुलना में एक तीव्र वृद्धि थी। रिपोर्ट के अनुसार, ये सजा कुछ सबसे आम अपराध धर्म, अंधविश्वास और विदेशी सांस्कृतिक सामग्री से संबंधित थे, जिनमें के-ड्रामा और के-पॉप का उपभोग शामिल था।
संयुक्त राष्ट्र की जांच के बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते 2015 से 2019 के बीच उत्तर कोरिया में फांसी की संख्या में कमी आई थी, लेकिन कोरोना महामारी में देश के अपनी सीमाएं बंद करने के बाद फांसी की सजाओं में भारी वृद्धि हुई। एनजीओ ने पाया कि उत्तर कोरिया में फांसी की सजाओं की संख्या किम जोंग उन के शासन के शुरुआती वर्षों में चरम पर थी, जिसमें 2013 में 80 से अधिक लोगों को फांसी दी गई थी।
संयुक्त राष्ट्र की एक ऐतिहासिक जांच के बाद इन आंकड़ों में गिरावट देखी जा रही है, जिसमें पाया गया कि प्योंगयांग व्यवस्थित रूप से मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा था। हालांकि, 2020 में कम से कम 54 लोगों को फांसी दी गई और अगले वर्ष 45 लोगों को फांसी के तख्ते तक पहुंचा दिया गया। यह संख्या 2016 और 2019 के बीच प्रति वर्ष औसतन 5 फांसी की तुलना में बहुत ही अधिक है और चिंता की बात है।
टीजेडडब्ल्यूजी की रिपोर्ट के अनुसार, किम के शासनकाल के दौरान फांसी और मृत्युदंड के 144 मामलों में से 29 को सामान्य अपराधों के लिए फांसी दी गई थी। इन लोगों के अपराध धर्म, अंधविश्वास और विदेशी संस्कृति से संबंधित थे। शोधकर्ताओं का कहना है कि किम सरकार दक्षिण कोरिया पॉप संस्कृति के प्रसार को अपनी विचारधारा के लिए खतरा मानती है। 2024 में 2 किशोरों को कोरियाई ड्रामा देखने पर 12 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी।
टीजेडडब्ल्यूजी के अनुसार, अन्य अपराध जिनके परिणामस्वरूप मृत्युदंड दिया गया उनमें किम या पार्टी की आलोचना करना, जानबूझकर हत्या करना, मादक पदार्थों की तस्करी करना और दूसरों को देश से भागने में मदद करना शामिल था। टीजेडडब्ल्यूजी ने एक बयान में कहा, चूंकि शासन सत्ता के चौथे वंशानुगत उत्तराधिकार का अनुसरण कर रहा है, इसलिए सांस्कृतिक और वैचारिक नियंत्रण को मजबूत करने और राजनीतिक वर्चस्व बनाए रखने के लिए फांसी की सजा में वृद्धि का उच्च जोखिम है।
टीजेडडब्ल्यूजी की रिपोर्ट के अनुसार, देश में साल 2011 से 2024 के बीच कुल 358 लोगों को फांसी दी गई, जिसमें 51 शहरों और काउंटियों के 250 से अधिक उत्तर कोरियाई भगोड़ों से गवाही एकत्र की गई थी। इन फांसियों में से 70 प्रतिशत से अधिक सार्वजनिक रूप से दी गई और उनमें से अधिकांश को गोली मारकर अंजाम दिया गया। टीजेडडब्ल्यूजी ने किम शासनकाल के दौरान देश भर में इस्तेमाल किए गए 46 फांसी स्थलों का मानचित्रण किया है।
टीजेडडब्ल्यूजी समूह की स्थापना 2014 में सियोल में दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया, अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा के कार्यकर्ताओं और शोधकर्ताओं द्वारा की गई थी। यह मानवाधिकारों के उल्लंघन पर नजर रखता है और उत्तर कोरिया में मृत्युदंड पर नियमित रिपोर्ट प्रकाशित करता है।
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